By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 24, 2026
महाराष्ट्र के अमरावती में एक सरकारी अस्पताल में भर्ती अपने बच्चों के स्वस्थ होने का इंतजार कर रहे माता-पिता एवं अन्य परिजन सोमवार तड़के अस्पताल के बाहर गहरी नींद में थे और उन्हें तनिक भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में एनआईसीयू में आग लग जाएगी और वहां भर्ती शिशुओं की जान खतरे में पड़ जाएगी। महाराष्ट्र के अमरावती शहर में सोमवार तड़के एक सरकारी अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में आग लगने से तीन शिशुओं की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने ‘पीटीआई-वीडियो’ को बताया कि जिला महिला अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भीषण आग लग गई, जिससे कुछ नवजात शिशु काली राख से ढक गए और वार्डों में अफरा-तफरी मच गई।
अधिकारियों के अनुसार, सोमवार तड़के करीब सवा तीन बजे अस्पताल की एनआईसीयू में आग लगी। इस इकाई में समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं का इलाज किया जा रहा था। अमरावती के अचलपुर निवासी योगेश सावरकर ने बताया कि उनकी पत्नी और आठ दिन का बच्चा अस्पताल में भर्ती थे तथा जब आग लगी, उस समय वह अस्पताल की इमारत के बाहर सो रहे थे।
सावरकर ने बताया कि उनका बच्चा अस्पताल की पहली मंजिल पर था। एक वार्ड में आग की लपटें फैलने पर वह ऊपर पहुंचे, अपने बच्चे को बचाया और उसे सुरक्षित नीचे ले आए। सावरकर और कुछ अन्य बच्चों के परिजनों ने बताया कि स्थिति बेहद गंभीर थी और वार्ड में भर्ती बच्चों के ऊपर तक आग फैल रही थी।
सावरकर ने कहा, “मेरा बच्चा पहली मंजिल पर था और मैं खुद जाकर उसे नीचे लेकर आया। हालांकि, मैंने अस्पताल में अन्य बच्चों को काली राख से ढका देखा।” उन्होंने कहा कि सुरक्षा गार्ड सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे और बच्चों को बचाना शुरू किया। उन्होंने एक नर्स को भी बच्चों की जान बचाने में मदद करते देखा।
बच्चों के परिजनों ने इस त्रासदी के लिए अस्पताल प्रशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। परिजनों ने कहा कि उन्हें आग लगने की सही वजह का पता नहीं है, लेकिन उन्होंने वार्ड में भीषण आग लगी देखी, जिसके बाद बच्चों के माता-पिता और अस्पताल के कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई।