17 देशों की संसदों में संबोधन, 27 देशों से सर्वोच्च सम्मान, विश्व मंच पर मोदी का जादू बरकरार

By नीरज कुमार दुबे | Jul 10, 2025

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक नेतृत्व के क्षेत्र में भारत को एक नई ऊँचाई पर पहुंचा दिया है। जहां एक ओर उन्होंने अब तक 17 देशों की संसदों को संबोधित कर भारत की आवाज़ को विश्वमंच पर मुखर किया है, वहीं दूसरी ओर 27 देशों से प्राप्त सर्वोच्च नागरिक सम्मानों ने उन्हें दुनिया के सबसे सम्मानित और प्रभावशाली नेताओं में स्थान दिला दिया है। यह उपलब्धियाँ केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक स्थिति की उन्नति का प्रतिबिंब हैं।

प्रधानमंत्री ने बढ़ाया देश का गौरव

इसके अलावा, प्रधानमंत्री को 27 देशों से मिले सर्वोच्च सम्मान पर गौर करें तो आपको बता दें कि उन्हें यूएई का "Order of Zayed", रूस का "Order of St. Andrew", अमेरिका का "Legion of Merit", फ्रांस का "Grand Cross of the Legion of Honour", सऊदी अरब का "King Abdulaziz Sash", बांग्लादेश का "Liberation War Honour" समेत अफ्रीकी और कैरिबियाई देशों से राष्ट्रीय सम्मान मिले हैं। यह दर्शाता है कि भारत की सॉफ्ट पावर, अर्थव्यवस्था, लोकतंत्र और रणनीतिक संतुलनकारी भूमिका को विश्व स्वीकार कर रहा है।

 

साथ ही प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पारंपरिक ‘गुटनिरपेक्षता’ से आगे जाकर "बहुध्रुवीय मित्रता" पर आधारित है। उन्होंने पश्चिमी शक्तियों से रिश्ते गहरे किए, लेकिन साथ ही अफ्रीका, मध्य एशिया, खाड़ी देशों और दक्षिण अमेरिका में नए रणनीतिक संबंध भी बनाए। मोदी की यह अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि भारत की उभरती शक्ति, विचारधारा और नेतृत्व क्षमता की स्वीकार्यता है। उनका हर संसद में दिया गया संबोधन, हर प्राप्त सम्मान, भारत की लोकतांत्रिक आत्मा, विकासशील दृष्टिकोण और नैतिक शक्ति का प्रतीक है।

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साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 देशों की संसदों को संबोधित करना और 27 देशों से सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करना, भारतीय विदेश नीति के इतिहास में एक अभूतपूर्व अध्याय है। यह दर्शाता है कि आज का भारत केवल सुनने वाला नहीं, बल्कि दुनिया को दिशा देने वाला देश बन चुका है। यह उपलब्धि भारतवासियों के आत्मविश्वास, आकांक्षाओं और अंतरराष्ट्रीय भूमिका को सशक्त करती है।

पीएम मोदी के उपहारों में झलकती है भारत की आत्मा

इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्व दौरों की चर्चा प्रायः उनकी रणनीतिक कूटनीति, वैश्विक नेतृत्व और द्विपक्षीय समझौतों के संदर्भ में होती है, किंतु इन यात्राओं में एक और विशेष पक्ष होता है जो चुपचाप भारत की आत्मा को विश्व के सामने प्रस्तुत करता है— वह है उनके द्वारा चयनित सांस्कृतिक उपहार। हम आपको बता दें कि हर दौरे में प्रधानमंत्री मोदी जिन विशिष्ट हस्तशिल्पों, कलाकृतियों और प्रतीकों को उपहार स्वरूप ले जाते हैं, वे केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध परंपरा, बहुरंगी संस्कृति और आत्मनिर्भर कलात्मकता का परिचायक होते हैं। यह सांस्कृतिक कूटनीति भारत की सॉफ्ट पावर को सशक्त करने में निर्णायक भूमिका निभा रही है।

 

हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी जिन वस्तुओं को विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को भेंट करते हैं, वे भारत के अलग-अलग राज्यों, जनजातियों, परंपराओं और शिल्प कलाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। प्रधानमंत्री मोदी के उपहार केवल भारत की कलाओं का प्रदर्शन नहीं, बल्कि संवाद का माध्यम भी हैं। प्रधानमंत्री के उपहार दर्शाते हैं कि भारत केवल तकनीक और व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता का जीवंत प्रतिनिधि है। इन उपहारों के चर्चित होने से संबंधित हस्तशिल्प की मांग और मूल्य दोनों बढ़ते हैं। इसके अलावा, 'मेक इन इंडिया' और 'वोकल फॉर लोकल' की नीतियों को सांस्कृतिक स्तर पर मजबूती मिलती है।

प्रधानमंत्री मोदी और प्रवासी भारतीय समुदाय

इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी किसी देश की यात्रा पर जाते हैं, तो उनकी पहली प्राथमिकता होती है— वहाँ बसे भारतीय समुदाय से संवाद। यह मुलाकातें केवल भावनात्मक संबंधों का प्रदर्शन नहीं बल्कि नागरिक जुड़ाव का शक्तिशाली प्रतीक बन चुकी हैं। प्रवासी भारतीयों द्वारा अपने सांस्कृतिक प्रदर्शन, लोककला, संगीत और पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से जो दृश्य निर्मित होता है, वह विश्व के सामने भारत की एकता में विविधता और सजीव परंपरा का संदेश देता है।

 

प्रधानमंत्री मोदी जब इन समुदायों से मिलते हैं, तो वह यह स्पष्ट करते हैं कि वे भारत के गौरव के वाहक हैं, वे भारत और दुनिया के बीच सांस्कृतिक पुल हैं और वे भारत की सॉफ्ट पावर के सशक्त स्रोत हैं। प्रधानमंत्री मोदी की प्रत्येक विदेश यात्रा में भारतीय समुदाय द्वारा प्रस्तुत नृत्य, संगीत, भजन, पारंपरिक वेशभूषा में स्वागत, भाषणों में भारत माता की जय घोष, आदि केवल रस्म अदायगी नहीं होती, बल्कि ये दिखाते हैं कि भारत कहीं भी जाए, अपनी संस्कृति को जीवंत रखता है, भारत की परंपरा आधुनिकता के साथ सह-अस्तित्व में है और भारत की ‘संवेदनशीलता’ और ‘संपर्क’ की नीति भावनात्मक संबंधों पर आधारित है।

प्रधानमंत्री मोदी का भारतीय समुदाय से संवाद और प्रवासी भारतीयों का उनके समक्ष अपनी संस्कृति का प्रदर्शन, एक सशक्त और गहरा वैश्विक संदेश देता है कि भारत केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि एक संस्कार, विचार और परंपरा है, जो सीमाओं से परे जाकर भी जीवित रहती है। यह 'एक भारत, वैश्विक भारत' की संकल्पना को मजबूत करता है और दुनिया को बताता है कि भारत एक ऐसे राष्ट्र के रूप में उभर रहा है जिसकी मूल्य आधारित कूटनीति, संस्कृति आधारित संवाद और नागरिक भागीदारी आधारित पहचान है।

बहरहाल, इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय विदेश नीति को पारंपरिक निष्क्रियता से निकाल कर सक्रिय, निर्णायक और बहुआयामी कूटनीति का रूप दिया है। उनकी रणनीति केवल राजनयिक संवादों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने भारत को एक निर्णायक और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है।

-नीरज कुमार दुबे

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