अंडमान बनेगा दूसरा Hormuz, भारत के दबदबे से होगी चीन की हालत खराब!

By अभिनय आकाश | May 16, 2026

हिंद महासागर में इस वक्त एक ऐसा गेम शुरू हो चुका है जिसका कंट्रोल जिसके हाथ में होगा भविष्य के एशिया की ताकत भी उसी के हाथ में होगी और अब भारत उसी गेम में अपना सबसे खतरनाक दांव खेलने जा रहा है। भारत की मुख्य भूमि से 1800 किलोमीटर दूर हिंद महासागर के बीचों-बीच मौजूद एक छोटा सा द्वीप, जिसे देखकर शायद दुनिया को कभी अंदाजा भी नहीं था कि एक दिन यही जगह चीन के लिए सबसे बड़ी टेंशन बन जाएगी और इसका नाम है ग्रेट निकोबार। सिर्फ 166 किमी दूर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्ते मलक्का स्टेट के ठीक पास भारत बना रहा है ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट। एक ऐसा प्रोजेक्ट जो सिर्फ पोर्ट नहीं सिर्फ एयरपोर्ट नहीं बल्कि हिंद महासागर में भारत का पावर स्विच है। क्योंकि यहां बनने जा रहा है इंटरनेशनल ट्रंपशिपमेंट पोर्ट। ड्यूल यूज़ एयरपोर्ट, नई टाउनशिप और एक ऐसा सामरिक हब जो सीधे-सीधे चीन की सबसे बड़ी कमजोरी के सामने खड़ा होगा। 

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आज एशिया के ज्यादातर जो जहाज हैं, यह सिंगापुर और श्रीलंका के कोलंबो पोर्ट पर रुकते हैं। जहाजों को ईंधन चाहिए होता है, मेंटेनेंस चाहिए होता है। कारगो ट्रांसफर करना होता है और इसी से सिंगापुर और कोलंबो अरबों डॉलर कमाते हैं। लेकिन भारत यह चाहता है कि भविष्य में यही जहाज ग्रेट निकोबार में रुके। इसका मतलब यह हुआ कि ट्रेड भी भारत के पास, रणनीतिक नियंत्रण भी भारत के पास और हिंद महासागर की निगरानी भी भारत के पास। और यही वजह है कि इस प्रोजेक्ट को सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बल्कि भारत का भविष्य का जियोपॉलिटिकल वेपन कहा जाता है। माना जाता है। लेकिन जैसे ही भारत ने हिंद महासागर में अपना सबसे बड़ा स्ट्रेटेजिक दांव खेलना शुरू किया वैसे ही देश की राजनीति भी इस द्वीप पर पहुंच गई। राहुल गांधी ग्रेट निकोबार पहुंचे। जंगलों में गए और उन्होंने सवाल उठाए कि यहां लाखों पेड़ काटे जाएंगे। कोरल रीफ खत्म होगी और आदिवासी समुदाय इससे प्रभावित होंगे। लेकिन अब सोशल मीडिया पर बड़ा सवाल पूछा जा रहा है। 

क्या भारत अपनी ही जमीन पर इतना बड़ा सामरिक प्रोजेक्ट भी नहीं बना सकता? 

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चीन की समुद्री लाइफ लाइन गुजरती है और इसी वजह से अब यह बहस सिर्फ पर्यावरण बनाम विकास की नहीं रही है। यह आपको समझना होगा बल्कि यह बहस अब भारत के समुद्री ताकत बनाम चीन की रणनीति की लड़ाई बन गई है। बीजेपी और सरकार समर्थक लगातार आरोप लगा रहे हैं कि जब चीन हिंद महासागर में बंदरगाहों का जाल बिछा रहा है तब भारत के सबसे महत्वपूर्ण स्ट्रेटेजिक प्रोजेक्ट का विरोध क्यों हो रहा है? सोशल मीडिया पर लोग पुराना मुद्दा भी याद दिला रहे हैं। साल 2004 और पांच में जब यूपीए सरकार ने सेतु समुद्रम प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। जहां रामसेतु क्षेत्र में समुद्री रास्ता बनाने की योजना थी। तब कोरल रीफ और मरीन लाइफ को लेकर इतनी बड़ी बहस क्यों नहीं हुई?  आज जब भारत मलक्का स्टेट के पास अपना सामरिक हब बना रहा है तो अचानक पर्यावरण सबसे बड़ा मुद्दा कैसे बन गया?

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