Anna Hazare Birthday: Jan Lokpal आंदोलन से सरकार की नींद उड़ाने वाले Anna Hazare, RTI कानून के भी रहे हैं असली हीरो

By अनन्या मिश्रा | Jun 15, 2026

भारतीय सेना को अपनी सेवाएं देने वाले एवं सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे आज यानी की 15 जून को अपना 89वां जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने लोकपाल बिल को पास करवाने से लेकर भ्रष्टाचार के खिलाफ तक अपनी आवाज को बुलंद किया था। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर समाजसेवी अन्ना हजारे के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

ज्वॉइन कर ली सेना

अन्ना हजारे के भीतर देश सेवा का जज्बा उफनता था। 60 के दशक के समय भारत-चीन युद्ध के बाद सरकार ने युवाओं को ज्यादा से ज्यादा सेना में आने की अपील की। जिस पर अन्ना हजारे भी सेना की मराठा रेजीमेंट पहुंच गए और यहां पर ड्राइवर के रूप में काम करने लगे।

नवंबर 1965 में अन्ना हजारे की खेमकरण सीमा पर तैनाती थी। तभी नवंबर में चौकी पर पाकिस्तानी हवाई हमला हुआ और वहां पर तैनात सभी लोग मारे गए। लेकिन अन्ना हजारे बच गए और इसके बाद वह लोगों की सेवा के बारे में सोचने लगे। जिससे कि उनको जीने का जो दूसरा मौका मिला है, वह बेकार न जाए।

गांव का चेहरा बदल दिया

सेना से रिटायर होने के बाद वह अपने पैतृक गांव के पास रालेगांव सिद्धि में रहने लगे। यह गांव बेहद गरीब था, जहां न तो पानी था और न ही बिजली थी। हर साल गर्मी में रालेगांव में त्राहि-त्राहि मच जाती थी। जिसके बाद अन्ना हजारे ने बदलाव का जिम्मा लिया और वह गड्ढा खोदकर उसमें बारिश का पानी जमा करने लगे।

पहले तो लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन फिर युवा अन्ना की लगन से सबको खींचा। गांववालों ने मिलकर पानी की बचत, पेड़ लगाने से लेकर अन्य काम करने लगे। वहां पर सौर ऊर्जा और गोबर गैस के जरिए बिजली की सप्लाई हुई। इससे रालेगांव की सूरत ही बदल गई थी। 

अन्ना ने लिया करप्शन खत्म करने का जिम्मा लिया 

इस गांव की कायाकल्प सरकार की नजरों से बचा नहीं रहा। जिसके लिए उनको पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। लेकिन उनका समाजसेवा का जज्ब यहीं नहीं रुका, बल्कि यह एक शुरूआत थी। अन्ना हजारे ने गांवों में गरीबी के लिए भ्रष्टाचार को जिम्मेदार मानते थे। इसके खिलाफ वह आंदोलन करने लगे थे। महाराष्ट्र की सत्ता हिलने लगी थी और यह 90 के दशक के शुरूआती दौर की बात है।

इसके अलावा अन्ना हजारे को सूचना के अधिकार कानून के लिए लड़ने के लिए भी जाना जाता है। साल 1997 में अन्ना ने इस कानून के सपोर्ट में जमकर आंदोलन किया था। साल 2003 में महाराष्ट्र की तत्कालीन सरकार ने इस कानून को अधिक सख्त और पारदर्शी बनाया था। जिसके अगले दो सालों बाद संसद ने सूचना का अधिकार कानून पास कर दिया, जोकि आज भी लोगों के काफी काम आ रहा है।

दिल्ली की राजनीति में चमके

अन्ना हजारे जनलोकपाल बिल के लिए अड़ गए थे, जिससे सरकारी भ्रष्टाचार जड़ से खत्म हो सके। जंतर-मंतर से शुरू हुए इस आंदोलन की शुरूआत में अन्ना या फिर अरविंद केजरीवाल को खास अहमियत नहीं मिली। लेकिन अपने गांधवादी तौर-तरीकों के साथ अन्ना जल्द ही अलग दिखने लगे और इसके बाद पूरा आंदोलन उनके नाम हो गया। युवाओं से लेकर परिवार पालने में जुटे आम आदमी को इसी अन्ना ने भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा किया।

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