Vanakkam Poorvottar: Annamalai के पीछे उमड़ रही लाखों की भीड़, We The Leaders लाई Tamil Nadu में नई राजनीतिक क्रांति

By नीरज कुमार दुबे | Jun 11, 2026

तमिलनाडु की राजनीति इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। पूर्व पुलिस अधिकारी और लोकप्रिय नेता के. अन्नामलाई का भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा पहली नजर में चौंकाने वाला जरूर लगा, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम लंबे समय से तैयार हो रही एक नई राजनीतिक दिशा का संकेत था। अन्नामलाई ने पार्टी से अलग होने के तुरंत बाद अपने नए जनआंदोलन "वी द लीडर्स" यानी "हम ही नेता हैं" की शुरुआत करके यह स्पष्ट कर दिया कि उनका लक्ष्य केवल संगठन खड़ा करना नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक वैकल्पिक शक्ति तैयार करना है।

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हम आपको बता दें कि अन्नामलाई के इस आंदोलन को अब तक सत्रह लाख से अधिक लोगों का समर्थन मिल चुका है। यह संख्या अपने आप में तमिलनाडु की राजनीति में एक नई हलचल का संकेत मानी जा रही है। आंदोलन से जुड़े नेताओं का दावा है कि आने वाले कुछ महीनों में पचास लाख से अधिक सदस्य जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। सदस्यता प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ओटीपी आधारित पंजीकरण के साथ-साथ मिस्ड कॉल व्यवस्था लाने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि तकनीकी दिक्कतों के बावजूद अधिक से अधिक लोग जुड़ सकें।

अन्नामलाई के नेतृत्व का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह माना जा रहा है कि उन्होंने कार्यकर्ताओं के भीतर आत्मविश्वास पैदा किया। एक पूर्व पुलिस अधिकारी से जननेता बने अन्नामलाई ने अपने संघर्ष, स्पष्ट भाषा और आक्रामक राजनीतिक शैली से युवाओं तथा सामान्य कार्यकर्ताओं को प्रभावित किया। उनके समर्थकों का कहना है कि जब उन्होंने तमिलनाडु भाजपा की जिम्मेदारी संभाली, तब पार्टी राज्य में सीमित प्रभाव वाली शक्ति थी, लेकिन उनके कार्यकाल में पार्टी का जनाधार तेजी से बढ़ा। लोकसभा चुनाव में मत प्रतिशत बढ़ने को भी उनके समर्थक उनकी मेहनत का परिणाम बताते हैं।

अन्नामलाई के इस्तीफे के बाद जिस तरह लगातार भाजपा नेताओं के त्यागपत्र सामने आए, उसने भाजपा नेतृत्व के लिए चिंता बढ़ा दी है। राज्य सचिव अमर प्रसाद रेड्डी ने पार्टी छोड़ते हुए खुलकर कहा कि वह अन्नामलाई की भविष्य की राजनीतिक यात्रा में उनके साथ रहेंगे। उनके अलावा करु नगराजन समेत कई अन्य नेताओं ने भी इस्तीफा देकर अन्नामलाई के प्रति अपनी निष्ठा दिखाई। यह घटनाक्रम बताता है कि अन्नामलाई केवल एक नेता नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच एक मजबूत जनआकर्षण का केंद्र बन चुके हैं।

अमर प्रसाद रेड्डी ने अपने बयान में आरोप लगाया कि तमिलनाडु भाजपा कुछ गिने चुने नेताओं के नियंत्रण में सिमट गई है। उन्होंने कहा कि अन्नामलाई के योगदान को उचित सम्मान नहीं मिला। उनका यह भी कहना था कि पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत और त्याग को नजरअंदाज किया गया। इन बयानों ने यह संकेत दिया कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष मौजूद था, जो अब खुलकर सामने आ रहा है।

मदुरै के पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष एम महा सुसींद्रन ने भी अन्नामलाई के नेतृत्व की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि अन्नामलाई ने तमिलनाडु के लोगों के बीच भरोसा पैदा किया और पार्टी को नई ऊर्जा दी। उन्होंने कहा कि अन्नामलाई के बाद नेतृत्व परिवर्तन और गठबंधन राजनीति ने कार्यकर्ताओं को निराश किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनावी सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन में कार्यकर्ताओं की मेहनत की अनदेखी हुई।

दिलचस्प बात यह है कि भाजपा से अलग होने के बाद भी अन्नामलाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति सम्मान बनाए रखा है। मोदी के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर अन्नामलाई ने उन्हें बधाई दी। इससे यह संदेश गया कि उनका संघर्ष विचारधारा से अधिक राज्य की राजनीतिक दिशा और संगठनात्मक शैली को लेकर है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इससे अन्नामलाई को उन कार्यकर्ताओं का समर्थन मिलता रहेगा जो मोदी की राजनीति से प्रभावित हैं लेकिन राज्य नेतृत्व से असंतुष्ट हैं।

अन्नामलाई के नए आंदोलन की एक और खासियत यह है कि वह पारंपरिक राजनीति से अलग सामाजिक मुद्दों पर ध्यान देने की बात कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े नेताओं ने स्पष्ट किया है कि अगले कुछ महीनों में छात्र, किसान और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अभियान चलाया जाएगा। इससे यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि यह केवल चुनावी मंच नहीं, बल्कि जनसरोकारों का आंदोलन है।

देखा जाये तो तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से द्रविड दलों के इर्द गिर्द घूमती रही है। लेकिन अन्नामलाई के उभार और उनके नए आंदोलन ने यह संकेत दिया है कि राज्य की जनता अब नए विकल्पों पर भी विचार कर रही है। युवाओं, ग्रामीण मतदाताओं और निराश कार्यकर्ताओं के बीच उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। यदि यह आंदोलन अपने संगठनात्मक विस्तार और जनसंपर्क अभियान को इसी गति से आगे बढ़ाता रहा, तो आने वाले चुनावों में तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

अन्नामलाई ने यह साबित किया है कि मजबूत इच्छाशक्ति, स्पष्ट दृष्टि और जमीनी संपर्क किसी भी नेता को जनआंदोलन का चेहरा बना सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि "वी द लीडर्स" आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है। फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है।

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