By नीरज कुमार दुबे | Oct 29, 2026
भारतीय वायु सेना की ताकत का आकलन केवल उसके लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और अत्याधुनिक हथियारों से नहीं किया जा सकता। असली ताकत उस नेतृत्व में होती है, जो जानता हो कि देश की सुरक्षा के लिए क्या जरूरी है, किस क्षमता की तत्काल आवश्यकता है और उस आवश्यकता को पूरा करने में देरी करने वालों से जवाब कैसे मांगा जाना चाहिए। अक्टूबर के अंत में रिटायर हो रहे एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह के नेतृत्व की चर्चा इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण हो जाती है। उनके कार्यकाल में एक तरफ भारतीय वायु सेना ने ऑपरेशन सिंदूर जैसे महत्वपूर्ण अभियान में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया, तो दूसरी तरफ रक्षा उत्पादन में देरी, पुराने विमानों की विदाई और नए विमानों को शामिल करने की चुनौती भी खुलकर सामने आई।
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यह टिप्पणी विशेष रूप से तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमानों की आपूर्ति में देरी के संदर्भ में महत्वपूर्ण थी। फरवरी 2025 में एयरो इंडिया के दौरान उन्होंने एचएएल की तैयारियों पर असंतोष जताया था। उन्हें आश्वासन दिया गया था कि 11 विमान तैयार होंगे, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। वायु सेना प्रमुख की चिंता स्पष्ट थी कि जब देश की सुरक्षा के लिए विमानों की आवश्यकता तत्काल है, तब केवल आश्वासनों से काम नहीं चल सकता। देखा जाये तो आत्मनिर्भरता तभी वास्तविक ताकत बनती है, जब स्वदेशी विमान और हथियार समय पर तैयार होकर सैन्य बलों की जरूरतें पूरी करें। एपी सिंह ने यही सवाल उठाया कि भारत को भविष्य के लिए तैयार होने के साथ वर्तमान की जरूरतें भी पूरी करनी होंगी।
एपी सिंह के कार्यकाल में ही 26 सितंबर 2025 को भारतीय वायु सेना ने मिग-21 को औपचारिक विदाई दी। छह दशक से अधिक समय तक देश की वायु रक्षा का हिस्सा रहे इस विमान का युग समाप्त हुआ। एपी सिंह के कार्यकाल में हुई यह विदाई आधुनिकीकरण की आवश्यकता का प्रतीक थी। पुराने विमानों को हटाना जरूरी था, लेकिन उनकी जगह आधुनिक विमानों को समय पर शामिल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण था। मिग-21 की विदाई ने भारतीय वायु सेना के सामने लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या और नए विमानों की उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों को और स्पष्ट किया। इस दिशा में 25 सितंबर 2025 को रक्षा मंत्रालय ने एचएएल के साथ 97 तेजस एमके-1ए विमानों की खरीद के लिए 62,370 करोड़ रुपये से अधिक का अनुबंध किया। इसमें 68 लड़ाकू और 29 दो-सीट वाले विमान शामिल हैं। आपूर्ति 2027-28 से शुरू होकर छह वर्षों में पूरी होनी निर्धारित है। इसी तरह फरवरी 2026 में वायु सेना के लिए अतिरिक्त मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट यानी राफेल की खरीद के प्रस्ताव को भी प्रारंभिक मंजूरी मिली। इन फैसलों और योजनाओं के बीच एपी सिंह की प्राथमिकता साफ रही कि वायु सेना को आधुनिक विमानों की जरूरत है, लेकिन खरीद की घोषणा से अधिक महत्वपूर्ण है उनकी समयबद्ध उपलब्धता।
इसके अलावा, मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय वायु सेना की भूमिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के केंद्र में ला दिया। पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किए गए अभियान ने सटीक प्रहार, खुफिया जानकारी, निगरानी, हथियार प्रणालियों और सैन्य समन्वय के महत्व को रेखांकित किया। एपी सिंह ने इस अभियान के संदर्भ में वायु शक्ति की अहमियत और आधुनिक सैन्य तैयारियों की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके नेतृत्व में सामने आई प्रमुख प्राथमिकताओं में सटीक हथियार, बेहतर संचार और नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तथा स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को मजबूत करना शामिल रहा।
साथ ही भारतीय वायु सेना की ताकत का एक दूसरा पक्ष भी है, जो आपदाओं और अंतरराष्ट्रीय संकटों के समय सामने आता है। परिवहन विमान, हेलीकॉप्टर और प्रशिक्षित वायु कर्मी दुर्गम क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने, बचाव दलों को तैनात करने और संकट में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में अहम भूमिका निभाते हैं। एपी सिंह के कार्यकाल में वायुसेना ने बड़े राहत अभियान भी चलाये। मार्च 2025 में म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत राहत सहायता भेजी। भारतीय वायु सेना के सी-130 और सी-17 परिवहन विमानों ने बचाव दलों, आवश्यक उपकरणों और राहत सामग्री की आवाजाही में योगदान दिया। यह अभियान भारत की क्षेत्रीय मानवीय सहायता क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण बना। साथ ही नेपाल में आई हालिया आपदा के दौरान भी भारतीय वायुसेना राहत कार्यों में शामिल हुई।
साथ ही एपी सिंह के लंबे उड़ान कॅरियर का समापन भी यादगार रहा। 12 अक्टूबर 2026 को जोधपुर में अभ्यास तरंग शक्ति के दौरान उन्होंने स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान में अपनी अंतिम फाइटर सॉर्टी पूरी की। इस उड़ान में उनके साथ मित्र देशों के विमान और भारतीय वायु सेना की सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम भी शामिल थी। वायु सेना ने इसे एक ऐसे फाइटर पायलट की यात्रा का महत्वपूर्ण क्षण बताया, जिसने नेतृत्व करते हुए आगे बढ़ने की परंपरा निभाई।
इसके बाद 20 अक्टूबर को डुंडीगल स्थित वायु सेना अकादमी में उन्होंने एचजेटी-16 किरण ट्रेनर विमान में अपनी अंतिम उड़ान भरी। इस उड़ान की सबसे भावुक बात यह थी कि उनके साथ उनके पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर, विंग कमांडर वीएस कोचर (सेवानिवृत्त) मौजूद थे, जिन्होंने चार दशक से अधिक समय पहले उन्हें उड़ान का पहला पाठ पढ़ाया था। लैंडिंग के बाद उन्हें वाटर कैनन सैल्यूट दिया गया। एपी सिंह ने इस अनुभव को अपने उड़ान सफर का एक पूरा चक्र समाप्त होने जैसा बताया। एक प्रशिक्षक के साथ उसी तरह के विमान में अंतिम उड़ान भरना, जिसमें उड़ान की शुरुआत हुई थी, उनके पेशेवर जीवन का प्रतीकात्मक समापन था। यह दृश्य केवल एक वरिष्ठ अधिकारी की विदाई नहीं, बल्कि उस अनुशासन, प्रशिक्षण और गुरु-शिष्य परंपरा का सम्मान था, जिस पर सैन्य विमानन की नींव टिकी होती है।
इसी क्रम में 25 अक्टूबर को वाराणसी के नमो घाट पर आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो ने भारतीय वायु सेना की सामूहिक शक्ति को भव्य रूप में प्रस्तुत किया। वायु सेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ एपी सिंह भी मौजूद थे। इस दौरान राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, तेजस, मिराज-2000 और मिग-29 सहित अनेक विमानों तथा हेलीकॉप्टरों ने हवाई प्रदर्शन किया।
हम आपको बता दें कि 27 अक्टूबर 1964 को जन्मे अमरप्रीत सिंह ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद 21 दिसंबर 1984 को भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन हासिल किया था। वह लड़ाकू पायलट, प्रशिक्षक और परीक्षण पायलट के रूप में आगे बढ़े। उन्होंने मिग-27 स्क्वॉड्रन की कमान संभाली, रूस में मिग-29 उन्नयन परियोजना का नेतृत्व किया और स्वदेशी तेजस के उड़ान परीक्षण कार्यक्रम में प्रोजेक्ट डायरेक्टर की जिम्मेदारी निभाई। पांच हजार घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव उनके लंबे पेशेवर कॅरियर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 30 सितंबर 2024 को उन्होंने वायु सेना प्रमुख का पद संभाला।
उनकी यात्रा इस बात की प्रेरणा देती है कि नेतृत्व किसी एक पद पर पहुंचने से नहीं बनता। वह वर्षों के प्रशिक्षण, तकनीकी समझ, अनुशासन और जिम्मेदारी निभाने के अनुभव से विकसित होता है। एक युवा पायलट से लेकर देश की वायु शक्ति की सर्वोच्च जिम्मेदारी तक पहुंचने का उनका सफर इसी निरंतर साधना का उदाहरण है। उनके निजी जीवन की बात करें तो बता दें कि उनकी पत्नी का नाम सरिता सिंह है। एपी सिंह को दौड़ने, स्क्वैश खेलने और फिटनेस बनाए रखने में रुचि है। उनके व्यक्तित्व का यह पक्ष बताता है कि लंबे और चुनौतीपूर्ण सैन्य कॅरियर में शारीरिक सक्रियता और अनुशासन कितने महत्वपूर्ण हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें खाना पकाने में भी रुचि है।
बहरहाल, एपी सिंह की विरासत को केवल किसी एक अभियान, विमान या खरीद समझौते से नहीं आंका जा सकता। मिग-21 की विदाई, तेजस की आपूर्ति पर स्पष्ट सवाल, नए विमानों की जरूरत, ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख, राहत अभियानों में वायु सेना की भूमिका और उनकी अंतिम उड़ानों का भावुक दृश्य, ये सभी उनके कार्यकाल के अलग-अलग पहलू हैं। एपी सिंह के कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण सीख भी यही है कि देश की सुरक्षा के लिए भविष्य की तैयारी जरूरी है, लेकिन वर्तमान की जरूरतों को पूरा करना उससे कम महत्वपूर्ण नहीं है। साथ ही उनका यह सफर केवल व्यक्तिगत उपलब्धि की कहानी नहीं, बल्कि निरंतर प्रशिक्षण, पेशेवर समर्पण और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता की भी कहानी है।
-नीरज कुमार दुबे