Yes Milord: शिक्षा मंत्री से लेकर NCERT की माफी बेकार, सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दे दिया, कि बड़ी बहस छिड़ गई?

By अभिनय आकाश | Feb 28, 2026

आज न्यायपालिका का खून बह रहा है जो बहुत गंभीर चिंता का विषय है। जब यह किताब बाजार और सोशल मीडिया पर उपलब्ध है तो बाद में प्रकाशन वापस लेना किस प्रकार प्रभावी होगा। अगर शिक्षकों और छात्रों को यह सिखाया जाएगा कि न्यायपालिका भ्रष्ट है तो इससे समाज में भ्रम और गलत संदेश जाएगा। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने एनसीआरटी को भरे कोर्ट रूम में यह फटकार लगाई है। वजह है क्लास एट की किताब में जुडिशियल करप्शन सेक्शन शामिल करने पर मचा विवाद।  न्यायपालिका में करप्शन से जुड़ा एक सेक्शन शामिल करने पर 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की। इस दौरान सीजीआई सूर्यकांत बेहद नाराज नजर आए। सरकार की तरफ से सॉललीिसिटर जनरल तुषार मेहता मामले की सुनवाई के दौरान पेश हुए थे। उन्होंने एनसीआरटी की गलती पर बिना शर्त माफी मांगी लेकिन सीजीआई इससे संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने कहा कि यह जुडिशरी को बदनाम करने की एक गहरी सोची समझी साजिश लगती है। यह न्यायपालिका पर पहली गोली चलाने जैसा है। आज न्यायपालिका मीडिया में रक्त रंजित नजर आ रही है जो बहुत गंभीर चिंता का विषय है। 

ऐसे पेश किया, जैसे कोई कार्रवाई नहीं की

कोर्ट ने कहा कि जिस भाग में अध्याय पर विचार-विमर्श और अंतिम निर्णय लिया गया, उसकी बैठकों के मिनट्स अगली सुनवाई में पेश किए जाए। अदालत ने उल्लेख किया कि सबंधित अध्याय में न्यायाधीशों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की संख्या का इस प्रकार सदर्भ दिया गया है, जिससे यह आभास होता है मानो उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई हो। बेच ने यह भी कहा कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणियों को संदर्भ से अलग हटकर इस प्रकार प्रस्तुत किया गया, मानो खुद मुख्य न्यायाधीश ने भ्रष्टाचार के अस्तित्व को स्वीकार किया हो।

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इसका प्रभाव अगली पीढ़ी तक पहुंचेगा: SC

न्यायालय ने यह भी कहा कि पुस्तक का प्रभाव केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके अभिभावको, व्यापक समाज और यहां तक कि अगली पीढ़ी तक भी पहुंचेगा। पीठ ने आगे कहा कि अध्याय में न्यायपालिका के ऐतिहासिक और सराहनीय कदमों, लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने में उसके योगदान का कोई उल्लेख नहीं है। कोर्ट ने कहा, 'यह मौन विशेष रूप से आपत्तिजनक है, जबकि इस न्यायालय ने अनेक उच्चाधिकारियों को भ्रष्ट आचरण और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के लिए कठोर फटकार लगाई है।' 

क्या हुआ कोर्ट रूम में?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि किताब में गलती के लिए एनसीईआरटी ने माफी मागी है। इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकात ने कहा, 'एनसीईआरटी की प्रेस विज्ञप्ति में क्षमा का एक भी शब्द नहीं है। जब मैने सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल से समाचार रिपोर्ट के सबंध में जानकारी लेने को कहा था, तब एनसीईआरटी ने चैप्टर का बचाव किया था। सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया कि जिन लोगों ने ऐसा किया, उन्हें भविष्य में एनसीईआरटी या किसी मंत्रालय से संबद्ध नहीं रखा जाएगा। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि यह बहुत हल्का रिजल्ट होगा। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि "Justice delayed is justice denied" शीर्षक से एक अन्य समस्याग्रस्त अध्याय भी था, जिसमें लंबित मामलों के संबंध में गलत आंकड़े दिए गए थे। बच्चों को यह नहीं सिखा सकते कि देश में न्याय से वंचित किया जाता है।

शिक्षा मंत्री ने खेद जताया, कहा-कड़ी कार्रवाई होगी

8वी की किताब पर सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि मैं खेद व्यक्त करता हूं। NCERT से संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी और ऐसी स्थिति फिर न बने सरकार इसका ध्यान रखेगी। 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाले चैप्टर को तैयार करने वाली कमिटी के सदस्यों पर एक्शन लिया जाएगा। जैसे ही यह हमारी जानकारी में आया तो किताबों को वापस करवाया गया। हमने शिक्षा सचिव से पता लगाने को कहा है कि किसने किताब में इस गैर-जिम्मेदाराना चैप्टर को जोड़ा है। उस पर कार्रवाई हो। एनसीईआरटी भी पता लगा रही है कि किसकी वजह से यह गलती हुई और इसके 'जिम्मेदार लोगों और प्रोसेस की भी पहचान कर रहे हैं। इससे पक्का होगा कि भविष्य में इस तरह की गलती न हो।

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