Micro Rejections । क्या आप भी अनजाने में अपने रिश्ते को कमजोर कर रहे हैं? । Expert Advice

By एकता | Jun 13, 2025

जैसे-जैसे रिश्ता आगे बढता है, कई बार ऐसा लगता है कि प्यार धीरे-धीरे कम होने लगा है। यह एक ऐसा दौर होता है जिससे ज्यादातर कपल कभी न कभी गुजरते हैं। रिश्ता अचानक नहीं टूटता, यह हर दिन, छोटी-छोटी बातों से थोडा-थोडा कर के फिसलता है। कभी अनदेखा करना, कभी जरूरतों को न समझना, तो कभी भावनाओं को नजअंदाज कर देना, ये सब मिलकर रिश्ते में दरार पैदा कर देते हैं।

डेटिंग कोच जिलियन टुरेकी बताती हैं कि कैसे 'माइक्रो रिजेक्शन' यानी वो छोटी-छोटी बातें जिन्हें हम नजरअंदाज कर देते हैं, महीनों और सालों में जमा होकर एक मजबूत रिश्ते को भी तोड सकते हैं। वो कहती हैं, 'हम शायद ही कभी इसलिए ब्रेकअप करते हैं क्योंकि हम सामने वाले से प्यार नहीं करते। असल में, ज्यादातर रिश्ते इसलिए टूटते हैं क्योंकि उनमें कनेक्शन की कमी हो जाती है। जब दो लोगों के बीच वो गहरा जुडाव नहीं बचता, तो धीरे-धीरे हम एक-दूसरे की जरूरतों को समझना और उन्हें पूरा करना छोड देते हैं। प्यार बना रहता है, लेकिन कनेक्शन के बिना वो भी अकेला पड जाता है।'

रिश्ते में अस्वीकृति क्या होती है?

डेटिंग कोच के मुताबिक, यह किसी भी रिश्ते को अंदर से तोडने वाली सबसे खामोश लेकिन सबसे असरदार वजह हो सकती है। जब कनेक्शन खोने लगता है, तो उसका एक बडा कारण होता है, बार-बार की गई छोटी-छोटी अस्वीकृतियां, जिन पर हम अक्सर ध्यान नहीं देते।

उन्होंने समझाया, 'हर बार जब हम अपने पार्टनर के साथ डिनर पर होते हुए भी मोबाइल में खोए रहते हैं, हर बार जब वो कुछ शेयर करना चाहते हैं और हम ध्यान न देकर स्क्रीन की ओर देख लेते हैं, यही हैं वो ‘माइक्रो रिजेक्शंस’। ये छोटी घटनाएं हफ्तों, महीनों और सालों में एक दीवार बन जाती हैं, जो रिश्ते के बीच खडी हो जाती है।'

कोच ने आगे कहा, 'इन लम्हों में हम प्यार करना नहीं छोडते हम बस जुडना छोड देते हैं। इसलिए अगर हम अपने रिश्ते को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो हमें इस बात के प्रति जागरूक होना होगा कि हम कब, कैसे और क्यों अपने पार्टनर को अनजाने में अस्वीकार कर रहे होते हैं। क्योंकि कई बार, अस्वीकार करने के लिए शब्दों की जरूरत नहीं होती, एक नजर बचा लेना ही काफी होता है।'

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रोजमर्रा की जिंदगी में रिश्ते को गहरा बनाने के छोटे लेकिन असरदार तरीके

डेटिंग कोच ने बताया कि मजबूत रिश्ते कोई एक दिन में नहीं बनते, ये रोजाना की कोशिशों और जुडाव से फलते-फूलते हैं। उन्होंने कहा,'एक रिश्ते को हर दिन थोडे से जुडाव की जरूरत होती है, एक सच्ची नजर मिलाना, बिना वजह की दयालुता, और पूरी मौजूदगी के साथ सुनना-समझना।'

उन्होंने आगे समझाया कि जब हम इन छोटी-छोटी चीजों को नजरअंदाज करने लगते हैं, तो रिश्ते में खालीपन पनपने लगता है। उन्होंने कहा, 'जब हम अपने रिश्ते को पोषण देना बंद कर देते हैं, तो अनजाने में हम एक-दूसरे से दूर होने लगते हैं। और ये दूरियां धीरे-धीरे इतनी बढ जाती हैं कि एक दिन हमें लगने लगता है जैसे हमें देखा ही नहीं गया, हमें अहमियत ही नहीं दी गई, या हमें चुना ही नहीं गया।'

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