महागठबंधन में शामिल नहीं होना चाहते हैं केजरीवाल, भाजपा को हराना कांग्रेस के बस में नहीं ! फिर कैसे बनेगी 2024 की योजना

By अनुराग गुप्ता | May 09, 2022

नयी दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ विपक्षी पार्टियों की एकजुटता से किनारा कर ​लिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन में शामिल नहीं होंगे और उनका गठबंधन सिर्फ और सिर्फ 130 करोड़ भारतीयों के साथ होगा। 

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अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वो किसी भी दल को हराना नहीं चाहते हैं बल्कि भारत को दुनिया का नंबर एक देश बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग पूछते हैं कि हम किसके साथ गठबंधन करेंगे। हम किसी को हराने के लिए 10 या 20 पार्टियों के साथ गठबंधन को नहीं समझते हैं। मैं किसी को हराना नहीं चाहता, मैं चाहता हूं देश जीते।

भाजपा का नाम लिए बगैर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वर्तमान में एक बड़ी पार्टी गुंडागर्दी,दंगों की साजिश कर रही है, बलात्कारियों के लिए स्वागत जुलूस निकाल रही है। देश इस तरह की गुंडागर्दी से आगे नहीं बढ़ सकता। अगर आप गुंडागर्दी और दंगे चाहते हैं तो आप उनके साथ जा सकते हैं, लेकिन अगर आप प्रगति चाहते हैं, स्कूल और अस्पताल चाहते हैं तो आप मेरे साथ आ सकते हैं। आइए 130 करोड़ आम लोगों का गठबंधन बनाएं।

भाजपा विरोधी दलों को लगा झटका

लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर तीसरा मोर्चा बनाए जाने की कवायद कई बार शुरू हो चुकी है। ऐसे में तमाम दल चाहेंगे कि आम आदमी पार्टी उनके गठबंधन में शामिल हो जाए क्योंकि पार्टी ने पंजाब में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी और गोवा में 2 सीटों पर उन्हें जीत मिली। जिसके बाद आम आदमी पार्टी का विश्वास काफी ज्यादा बढ़ा-चढ़ा दिखाई दे रहा है और पार्टी आगामी हिमाचल प्रदेश, गुजरात में भी अपनी पूरी ताकत झोंकने वाली है। हालांकि अरविंद केजरीवाल ने महागठबंधन से इनकार कर भाजपा विरोधी दलों को बड़ा झटका दिया है।

कांग्रेस के बस में नहीं है विपक्षी भूमिका को संभालना

विपक्षी मोर्चे में भले ही भाजपा को हराने की जिम्मेदारी कांग्रेस के ऊपर हो लेकिन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे चेहरे अब फीके पड़ गए हैं और साल 2019 का लोकसभा चुनाव भी कोई नहीं भूल पाया है। जिसमें करारी हार का सामना करने के बाद राहुल गांधी ने व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था और कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में स्पष्ट कर दिया था कि बहन प्रियंका गांधी को अध्यक्ष बनाने के बारे में कोई सोचे भी ना और तब का दिन है और आज का दिन है कि कांग्रेस को कोई पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं मिल पाया है। जिसका खामियाजा पार्टी को लगातार विधानसभा चुनावों में उठाना पड़ रहा है। 

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ऐसे में विपक्ष की भूमिका संभाल पाना कांग्रेस के बस के बाहर की बात लग रही है। वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी लगातार तीसरी बार पश्चिम बंगाल की मुखिया बनने के बाद अपने संपर्क का दायरा बढ़ाने का प्रयास किया लेकिन फिर उनका हर महीने दिल्ली दौरा करने का वादा ठंडे बस्ते में चला गया।

मता बनर्जी यूं तो तीसरा मोर्चा बनाना चाहती थीं लेकिन महाराष्ट्र के नेताओं से साफ कर दिया था कि कांग्रेस के बिना महागठबंधन संभव नहीं। जिसके बाद तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भी भाजपा विरोधी दलों को एकजुट करने की कवायद में जुट गए और हुआ यूं कि वो महाराष्ट्र के अलावा नेताओं से संपर्क साधने के लिए कहीं और नहीं गए और अब तो अगले साल तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में पहले उन्हें अपने राज्य की तरफ पूरा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है क्योंकि कांग्रेस और भाजपा उन पर जमकर हमले कर रही है।

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