Demonetisation पर SC के फैसले पर बोले Assam CM, कानून और जनता की अदालत में गलत साबित हुआ विपक्ष का दावा

By अंकित सिंह | Jan 02, 2023

नोटबंदी को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी को अनुचित नहीं बताया है। कहीं ना कहीं यह भाजपा के लिए एक बड़ी खबर है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर भाजपा नेता जबरदस्त तरीके से विपक्षी दलों पर हमलावर है। दरअसल, विपक्षी दल लगातार भाजपा को इस मुद्दे पर घेर रहे हैं। इन सबके बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने साफ तौर पर कहा है कि जनता और कानून की अदालत में विपक्ष एक बार फिर से गलत साबित हुआ है। असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि नोटबंदी को लेकर विपक्ष ने होहल्ला मचाया था, लेकिन 2016 के बाद से कई चुनावी जनादेशों ने ऐतिहासिक फैसले को जनता का समर्थन साबित किया है। 

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हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि नोटबंदी से काले धन पर लगाम लगी है, नक्सली हिंसा में कमी आई है, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिला है और अब सुप्रीम कोर्ट ने इसे सही ठहराया है। असम के मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राफेल डील हो, आधार एक्ट हो, पीएम केयर हो या सेंट्रल विस्टा, विपक्ष ने उन्हें असंवैधानिक करार दिया लेकिन हर बार कानून और जनता की अदालत में गलत साबित हुआ। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस को चुनिंदा अल्पसंख्यक फैसलों का हवाला देने और बहुमत के फैसले को नजरअंदाज करने की आदत है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्पष्ट करता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिया गया फैसला देशहित में था। उसमें सभी प्रावधानों का पालन किया गया था। RBI से भी बात की गई थी। इससे किछ विपक्षी दलों के पेट में दर्द हुआ था। 

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उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने केंद्र सरकार के 2016 में 500 और 1000 रुपये की श्रृंखला वाले नोटों को बंद करने के फैसले को सोमवार को 4:1 के बहुमत के साथ सही ठहराया। पीठ ने बहुमत से लिए गए फैसले में कहा कि नोटबंदी की निर्णय प्रक्रिया दोषपूर्ण नहीं थी। हालांकि न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ने सरकार के फैसले पर कई सवाल उठाए। न्यायमूर्ति एस. ए. नज़ीर की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि आर्थिक मामले में संयम बरतने की जरूरत होती है और अदालत सरकार के फैसले की न्यायिक समीक्षा नहीं कर सकती। पीठ में न्यायमूर्ति नज़ीर के अलावा न्यायमूर्ति बी. आर. गवई , न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना, न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन भी शामिल हैं। 

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