By एकता | May 24, 2026
असम के कई जिलों में मस्जिद समितियों ने एक बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की है कि आगामी 28 मई को आने वाली बकरीद पर गाय की कुर्बानी नहीं दी जाएगी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस कदम की सराहना करते हुए इसे एक स्वैच्छिक निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला बहुसंख्यक समुदाय की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करता है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गोकशी के खिलाफ मस्जिदों द्वारा की गई इस अपील की खुलकर तारीफ की। उन्होंने इसके कानूनी और धार्मिक पहलुओं को समझाते हुए कहा कि ऐसे कदम समाज में सांप्रदायिक सद्भाव को और मजबूत करेंगे। सीएम सरमा ने सोशल मीडिया पर इस फैसले से जुड़ी खबरों की कतरनें साझा करते हुए लिखा, "मैं इस प्रयास का स्वागत करता हूं। मुझे उम्मीद है कि अन्य समितियां भी इसी तरह की अपील जारी करेंगी।"
मस्जिद समितियों की ओर से यह अपील असम मवेशी संरक्षण अधिनियम, 2021 के लागू नियमों के बीच आई है। यह कानून राज्य में बीफ के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध तो नहीं लगाता, लेकिन मवेशियों के वध और उनके व्यापार पर कुछ सीमाएं जरूर तय करता है। इस अधिनियम के तहत मवेशियों की कुर्बानी के लिए पहले से अनुमति लेने और उनके अवैध परिवहन को रोकने के लिए बेहद कड़े नियम बनाए गए हैं।