By अनन्या मिश्रा | Oct 27, 2026
हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत करती हैं। वहीं रात को चंद्रमा के दर्शन और करवा माता की पूजा करके व्रत पूरा करती हैं।
इसे भी पढ़ें: स्वाति नक्षत्र में सूर्य का गोचर, 6 नवंबर तक मेष समेत 3 राशियों को करियर में लाभ
वैदिक पंचांग के मुताबिक कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरूआत 29 अक्तूबर को सुबह 01:06 मिनट से हो रही है। वहीं इस तिथि की समाप्ति 29 अक्टूबर की रात 10:09 मिनट पर होगी। वहीं 29 अक्टूबर को पूजा का मुहूर्त शाम 5:38 मिनट से 6: 56 तक है और चंद्रोदय रात 08:17 मिनट के आसपास होगा।
हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ महिलाएं यह व्रत करती हैं। इस व्रत में महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत करती हैं। फिर रात में चांद के निकलने पर दर्शन-पूजन करके पति के हाथों जल ग्रहण करती हैं और व्रत तोड़ती हैं। इस दिन करवा माता की पूजा, व्रत कथा का पाठ करना और चंद्रमा के दर्शन करना शुभ माना जाता है। वहीं महिलाएं इस दिन 16 श्रृंगार करती हैं और करवा माता से घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।