By अभिनय आकाश | Apr 18, 2026
ऑस्ट्रेलिया ने अपनी नेशनल डिफेंस स्ट्रेटजी 2026 जारी की है। इस हजार पन्नों से ज्यादा के विज़ वाले डॉक्यूमेंट्स में अगर किसी देश का नाम सबसे ज्यादा चमक रहा है तो वो भारत है। ऑस्ट्रेलिया ने ना सिर्फ भारत को अपना टॉप टियर सुरक्षा भागीदार माना है बल्कि हिंद महासागर में अपना सबसे महत्वपूर्ण डिफेंस पार्टनर भी घोषित कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रालय ने इंटीग्रेटेड इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम पेश किया है जो अगले 10 सालों में यानी 2036 तक का एक रोड मैप है। इसका कुल बजट देखा जाए तो ऑस्ट्रेलिया रक्षा क्षेत्र में अगले दशक में 888 अरब डॉलर खर्च करने जा रहा है। इसमें से $425 अरब डॉलर सीधे तौर पर नई सैन्य क्षमताओं, आधुनिक हथियारों और तकनीक पर खर्च होंगे और 2033 तक ऑस्ट्रेलिया अपना रक्षा खर्च अपनी जीडीपी के 3% तक ले जाएगा जो किसी भी विकसित देश के लिए एक बहुत बड़ा आंकड़ा है।
इसमें तीन मुख्य बातें शामिल हैं। पहली लगातार तैनाती। ऑस्ट्रेलिया अपनी सेना की टुकड़ियों को यहां तैनात रखेगा। दूसरा दमदार ट्रेनिंग और एक्सरसाइज। भारतीय सेना के साथ मिलकर बड़े लेवल पर युद्धभ्यास किए जाएंगे। तीसरा पूरे क्षेत्र में निगरानी। समंदर के रास्ते कौन आ रहा है, कौन जा रहा है? इस पर बारीक नजर रखने के लिए दोनों देश मेरिटाइम डोमेन अवेयरनेस यानी निगरानी का एक मजबूत सिस्टम बनाएंगे। सबसे गौर करने वाली बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया सिर्फ बंदूके और जहाज नहीं लाना चाहता बल्कि वो भारत के साथ डिफेंस इंडस्ट्री यानी हथियार और तकनीक बनाने के क्षेत्र में भी जुड़ना चाहता है। साथ ही दोनों देशों के सैनिक एक दूसरे से नई चीजें सीख सकेंगे। इसके लिए एजुकेशन और ट्रेनिंग पर भी खासा जोर दिया जाएगा। इस रिपोर्ट में क्वाड जिसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका शामिल हैं। इसे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे वाइटल यानी अनिवार्य पार्टनरशिप बताया गया है।
ऑस्ट्रेलिया चाहता है कि यह चारों देश मिलकर समंदर में डोमेन अवेयरनेस बढ़ाएं। यानी समंदर में कौन सा जहाज कहां घूम रहा है और क्या कर रहा है इस पर पैनी नजर रखी जाए। आपको बता दें क्वाड को बनाने का मुख्य मकसद हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र को खुला। सुरक्षित और व्यापार के लिए आसान बनाए रखना है। आसान भाषा में कहें तो समंदर के इस इलाके में चीन के बढ़ते दबदबे और उसकी दादागिरी को रोकने के लिए यह चार दिग्गज देश एक साथ आए हैं। यह देश सिर्फ सैन्य मोर्चे पर नहीं बल्कि तकनीक, जलवायु परिवर्तन और सप्लाई जैसे मुद्दों पर भी एक दूसरे की मदद करते हैं। और क्योंकि इस पूरे क्षेत्र में भारत की स्थिति सबसे मजबूत है तो ऑस्ट्रेलिया किसी भी कीमत पर भारत का साथ यहां पर चाहता है।