व्हाट्सएप के एडमिन है तो संभल जाइए अन्यथा जाना पड़ेगा जेल!

By विंध्यवासिनी सिंह | Dec 29, 2021

व्हाट्सएप आज के समय में सर्वाधिक इस्तेमाल होने वाला मैसेजिंग एप बन गया है। अगर कोई एक व्यक्ति दिन भर में 5 घंटे स्मार्टफोन इस्तेमाल करता है, तो उसमें 1 घंटे से अधिक समय तक तो वह व्हाट्सएप अवश्य ही देखता है। समझा जा सकता है कि व्हाट्सएप पर प्रत्येक दिन लोग अच्छा खासा समय बिताते हैं। 

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पर अब अगर कोई ऐसे मैसेज की कंप्लेन करता है, तो व्हाट्सएप से यह पता चल जाएगा कि उस मैसेज को कहां से भेजा गया था और किसने उस मैसेज को फॉरवर्ड किया। ऐसे में सरकारी अधिकारियों द्वारा जानकारी मांगने पर व्हाट्सएप द्वारा यह जानकारी दे दी जाएगी और इसकी वजह से आप को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। 

ऐसा कई लोगों के साथ हो चुका है, तो आइए आपको कुछ टिप्स बताते हैं जिससे आप सावधान रह सकते हैं। 

व्हाट्सएप ग्रुप पर सावधानी बरतें 

जी हां अगर आप किसी व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़े हैं, तो उस पर सावधानी रखिये। अगर उस ग्रुप में अनैतिक मैसेज शेयर किए जाते हैं, प्रोपेगेंडा और झूठ फैलाया जाता है, तो आपको आईटी सेल में कंप्लेंट कर देनी चाहिए। अगर आप इसे छुपाते हैं या इसे फॉरवर्ड करते हैं, तो आप इस अपराध में सहभागी बन जाते हैं। 

ऐसे में ग्रुप में जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है और मामला गंभीर होने पर जेल भी जाना पढ़ सकता है। मतलब साफ है कि ऐसे ग्रुप में आप जुड़े ना रहें जहां पर देश के खिलाफ, राष्ट्र के खिलाफ नफरत इत्यादि की बातें होती है। उन्हें या तो छोड़ दे या फिर ऐसे लोगों के खिलाफ आईटी सेल में कंप्लेन करें।

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कंट्रोवर्शियल मैसेज को फॉरवर्ड ना करें

  

जी हां अगर आपके पास व्हाट्सएप मैसेज आते हैं और अपने गलती से भी उस मैसेज को फॉरवर्ड कर दिया है और उसकी किसी ने कंप्लेंट कर दी तो फिर आप के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो सकता है। कई बार इस तरह के आधारहीन मैसेज को लोग हल्के में ले कर फॉरवर्ड कर देते हैं, किंतु आपको यह भूलना नहीं चाहिए कि नफरत फैलाने वाले मैसेज को, देश विरोधी मैसेज को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। खास बात यह भी है कि अगर कोई दूसरा व्यक्ति बार-बार इस तरह की कंट्रोवर्सी मैसेज फॉरवर्ड करता है तो उसके खिलाफ कंप्लेंट अवश्य ही करनी चाहिए। 

मामला बड़ा साफ है, टेक्नोलॉजी का प्रयोग हम अपने जीवन की बेहतरी के लिए कर सकते हैं, समाज की बेहतरी के लिए कर सकते हैं, ना की लोगों के बीच में सद्भावना बिगाड़ने या संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने की कवायद में। 

- विंध्यवासिनी सिंह

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