By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 09, 2021
नयी दिल्ली। राज्यसभा में मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष की विदाई के अवसर पर ना केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बल्कि खुद गुलाम नबी आजाद भी कुछ पलों के लिए भावुक हो गए तथा उन्होंने देश से आतंकवाद के खात्मे और कश्मीरी पंडितों के आशियानों को फिर से आबाद किए जाने की कामना की। उच्च सदन में अपने विदाई भाषण के दौरान आजाद ने उस घटना का विवरण दिया जिसकी चर्चा करते हुए इससे पहले प्रधानमंत्री का गला रूंघ गया। आजाद ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर का मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही दिनों के भीतर कश्मीर में पर्यटकों पर आतंकी हमला हुआ और कुछ पर्यटक मारे गए थे। इनमें गुजरात के पर्यटक भी थे। उन्होंने कहा कि वह जब हवाईअड्डे पहुंचे तब पीड़ित परिवारों के बच्चे उन्हें पकड़कर रोने लगे। आजाद ने कहा कि वह दृश्य देखकर उनके मुंह से चीख निकल गई, ‘‘खुदा तूने ये क्या किया...मैं क्या जवाब दूं इन बच्चों को...इन बच्चों में से किसी ने अपने पिता को गंवाया तो किसी ने अपनी मां को...ये यहां सैर करने आए थे और मैं उनकी लाशें हवाले कर रहा हूं...।’’ इसी कड़ी में आजाद ने कहा, ‘‘अल्लाह से... भगवान से... यही दुआ करते हैं कि इस देश से आतंकवाद खत्म हो जाए।’’
मुस्लिम देशों की स्थिति बयान करते हुए उन्होंने पाकिस्तान का उल्लेख किया और कहा कि वहां जो सामाजिक बुराइयां हैं, वह भारत में नहीं है। उन्होंने कामना करते हुए कहा, ‘‘हमारे मुसलमानों में ये सामाजिक बुराइयां कभी ना आए।’’ इससे पूर्व प्रधानमंत्री मोदी आतंकवाद से जुड़ी एक घटना के बाद आजाद द्वारा पीड़ितों की मदद के लिए किए गये कार्यों को याद करते हुए भावुक हो गये। उस समय मोदी गुजरात के तथा आजाद जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री थे। मोदी ने आजाद से उस आतंकी घटना से प्रभावित लोगों की मदद के लिए कहा था।