By नीरज कुमार दुबे | Aug 26, 2026
राजनीति और मनोरंजन की दुनिया में अपने बेबाक बयानों से अक्सर सुर्खियां बटोरने वाली बीजेपी सांसद कंगना रनौत इस बार योगगुरु बाबा रामदेव से सीधे भिड़ गई हैं। शुरुआत कंगना के विवादित “Generation Gutter” बयान से हुई, लेकिन देखते ही देखते मामला युवाओं से निकलकर कंगना की जवानी, निजी जिंदगी, चरित्र और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। रामदेव ने कंगना के अतीत और युवावस्था पर सवाल उठाए तो कंगना ने ऐसा पलटवार किया कि बाबा को आखिरकार कहना पड़ा कि वह इस विवाद को और आगे नहीं बढ़ाना चाहते।
यहीं से विवाद ने नया मोड़ ले लिया। कंगना को खास तौर पर रामदेव का उनकी जवानी और निजी जीवन पर टिप्पणी करना नागवार गुजरा। उन्होंने इंस्टाग्राम के जरिए ऐसा जवाब दिया, जिसमें व्यंग्य, निजी पलटवार और पतंजलि से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के मामले, तीनों का तड़का था। कंगना ने लिखा, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में दिवास्वप्न मत देखिए। अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही कुछ भी मान सकते हैं। कम से कम मुझे तो झूठे या भ्रामक प्रभावकारिता दावों के मामले में सुप्रीम कोर्ट से फटकार नहीं लगी।” कंगना यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने रामदेव को चरित्र पर उपदेश देने से भी साफ मना कर दिया और दो टूक कहा, “मुझे कैरेक्टर लेसन मत दीजिए। तुमसे तो बहुत ज्यादा बेहतर है मेरा कैरेक्टर। नो फ्रॉड डिटेक्टेड हियर।”
यानी कंगना ने रामदेव के उस सवाल का जवाब सिर्फ शब्दों से नहीं दिया, बल्कि तंज का पूरा तरकश खोल दिया। संदेश साफ था कि मेरी जवानी और निजी जिंदगी पर टिप्पणी करोगे, तो जवाब तुम्हारे सार्वजनिक रिकॉर्ड से दिया जाएगा। विवाद बढ़ने के बाद कंगना ने अपने रुख को और कठोर कर दिया। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव ने महिलाओं को लेकर अपनी टिप्पणियों में “मर्यादा की हर सीमा पार कर दी है।”
कंगना के मुताबिक, किसी महिला पर इस तरह की टिप्पणी करना सिर्फ व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि समाज को शर्मसार करने वाला व्यवहार है। उन्होंने यहां तक कहा कि रामदेव ने अपनी भगवा वेशभूषा की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है। कंगना ने कहा कि महिलाओं को लेकर रामदेव जिस तरह की बातें करते हैं, उन्हें अपने नजरिए पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका आरोप था कि उन्हें निशाना बनाकर व्यक्तिगत टिप्पणियां करना कहीं न कहीं पब्लिसिटी हासिल करने की कोशिश भी है।
हम आपको बता दें कि कंगना के पलटवार का सबसे तीखा हिस्सा पतंजलि से जुड़े उस मामले को लेकर था, जिसमें 2024 में बाबा रामदेव और उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष माफी मांगनी पड़ी थी। दरअसल, पतंजलि आयुर्वेद के भ्रामक विज्ञापनों से जुड़े मामले में दोनों ने अखबारों में सार्वजनिक माफीनामा जारी किया था। इसमें अदालत के निर्देशों और पहले दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं करने पर खेद जताया गया था। साथ ही भविष्य में ऐसे औषधीय दावे न करने और आधुनिक चिकित्सा पद्धति के खिलाफ आपत्तिजनक या अपमानजनक बयान न देने का भरोसा भी दिया गया था।
कंगना ने इसी पुराने विवाद को अपनी जवाबी राजनीति और व्यक्तिगत प्रतिरोध का हथियार बना दिया। उनका तर्क था कि जो व्यक्ति खुद सुप्रीम कोर्ट के सामने अपने विज्ञापन संबंधी दावों पर सफाई और माफी दे चुका हो, वह उन्हें चरित्र का पाठ पढ़ाने की स्थिति में कैसे हो सकता है?
उधर, कंगना के इस तीखे हमले के बाद बाबा रामदेव ने विवाद को ज्यादा हवा देने से इंकार कर दिया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। रामदेव ने कहा, “मैं इस मामले को बढ़ाना नहीं चाहता। देश जानता है कि स्वामी रामदेव कौन हैं और मेरा योगदान क्या है। इसलिए मैं ऐसे लोगों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।” दिलचस्प बात यह है कि कंगना ने जहां रामदेव पर व्यक्तिगत हमला करने और मर्यादा लांघने का आरोप लगाया, वहीं रामदेव ने जवाब में अपने योगदान और सार्वजनिक पहचान का हवाला देते हुए विवाद से पीछे हटने का संकेत दिया।
बहरहाल, अब रामदेव भले ही कह रहे हों कि वह विवाद नहीं बढ़ाना चाहते, लेकिन इतना तय है कि “Generation Gutter” की बहस में उतरे बाबा रामदेव को कंगना ने जवाब ऐसा दिया कि चर्चा Gen Z से निकलकर सीधे ‘जवानी, बेडरूम, चरित्र और सुप्रीम कोर्ट’ तक जा पहुंची।