बलूचिस्तान का नया संविधान, हिंदी-हिन्दू को दे डाली मान्यता!

By अभिनय आकाश | Feb 13, 2026

पाकिस्तान नाम का जो महल 1947 में खड़ा किया गया था उसमें दरारें तो बहुत पहले पड़ चुकी हैं लेकिन 8 फरवरी 2026 को जो हुआ वो शायद उस महल के गिरने की आधिकारिक शुरुआत माना जाएगा। बलूच राष्ट्रवादियों ने अपना बलूचिस्तान लिबरेशन चार्टर जारी कर दिया। यानी आजाद बलूचिस्तान का एक अंतरिम संविधान और इस संविधान में जो लिखा है उसने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक हलचल मचा दी है। सबसे ज्यादा चुभने वाली बात क्या है वो यह है कि इसमें हिंदी हिंदू और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर स्पष्ट प्रावधान है। अब बलोच नेताओं ने इस दस्तावेज को दुनिया के सामने पेश कर दिया। मरियार बलोच ने इसे सार्वजनिक किया। यह सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं है। यह एक वैचारिक घोषणा है। 

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हजारों बलोच कार्यकर्ताओं के गायब होने के आरोप लगाए। लेकिन अब जो संविधान सामने आया है बलोचों की तरफ से वो पहली ही पंक्ति में धर्म और राजनीति को अलग कर देता है। यानी ना जिहाद की राजनीति होगी, ना मजहबी कट्टरता, ना अल्पसंख्यकों पर अत्याचार। यह मॉडल सीधे-सीधे पाकिस्तान के सिस्टम को चुनौती देता है। सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की हो रही है वो है इस संविधान में हिंदू, सिख और ईसाई समुदाय को पूर्ण सुरक्षा और समान अधिकार देने का वादा। जहां पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हमले, जबरन धन परिवर्तन और भेदभाव की खबरें आती रहती है। वहीं बलूचिस्तान का प्रस्तावित संविधान कहता है कि सभी धर्मों को समान दर्जा मिलेगा। पूजा की स्वतंत्रता मिलेगी। 

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नागरिक अधिकारों में कोई भेदभाव नहीं होगा। और यही बात पाकिस्तान को सबसे ज्यादा चुभ रही है। अब आते हैं उस बिंदु पर जिसने इस पूरे घटनाक्रम को और बड़ा बना दिया। बलूचिस्तान लिबरेशन चार्टर को 11 प्रमुख भाषाओं में अनुवाद किया गया। इसमें शामिल है हिंदी, मराठी, गुजराती, पंजाबी। यह सिर्फ भाषाई अनुवाद नहीं है। यह एक रणनीतिक संदेश है। बलूच नेतृत्व दुनिया को बताना चाहता है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ संवाद के लिए तैयार है और भारत की जनता तक भी अपना संदेश पहुंचाना चाहता है। कई रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि भारतीय समर्थकों ने अनुवाद में सहयोग किया। यह पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक झटका है। इस दस्तावज को तैयार करने का श्रेय बलूच राष्ट्रवादी नेता हिरबयार को जाता है। 

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