By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 31, 2026
बांग्लादेश के एक विपक्षी नेता ने अपने देश से होकर भारतीय ट्रांजिट कॉरिडोर बनाने की किसी भी कोशिश के खिलाफ चेतावनी दी है और दिसंबर में गंगा संधि की अवधि समाप्त होने से पहले नयी दिल्ली के साथ जल बंटवारे को लेकर एक निष्पक्ष समझौता करने की मांग की। स्थानीय मीडिया में आई खबरों से यह जानकारी मिली। नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के संयोजक नाहिद इस्लाम ने शुक्रवार को ढाका में एक रैली के दौरान यह बात कही, जिसमें पार्टी के सैकड़ों समर्थक शामिल हुए।
बांग्लादेशी अखबार प्रोथोम आलो और समाचार वेबसाइट बीडीन्यूज24 के अनुसार, उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर गंगा जल-बंटवारा समझौता ऐसी शर्तों पर नवीनीकृत नहीं किया गया, जिनसे नदी के जल में बांग्लादेश का हिस्सा सुरक्षित रहे, तो वे नये सिरे से विरोध-प्रदर्शन करेंगे। एनसीपी एक राजनीतिक दल है, जिसे फरवरी 2025 में छात्र-नेतृत्व वाले उस आंदोलन के नेताओं ने बनाया था, जिसने जुलाई-अगस्त 2024 के विरोध-प्रदर्शनों की अगुवाई की थी। इन्हीं प्रदर्शनों के चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा था।
बीडीन्यूज24 के अनुसार, नाहिद ने कहा, ‘‘जापान एक बार फिर बांग्लादेश के रास्ते एक कॉरिडोर बनाने की कोशिश कर रहा है। सरकार इस अवैध कॉरिडोर को भारत को सौंपने की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान, हम साफ तौर पर कहना चाहते हैं कि बांग्लादेश की जनता को ऐसा कोई भी अवैध कॉरिडोर मंजूर नहीं होगा।’’ रहमान ने 26 से 29 अक्टूबर तक जापान का दौरा किया।
इस दौरान, दोनों देश अपनी बे ऑफ बंगाल इंडस्ट्रियल ग्रोथ बेल्ट पहल को एक नयी रणनीतिक सहयोग पहल में बदलने पर सहमत हुए। इस नयी पहल का मुख्य जोर कनेक्टिविटी को मजबूत करने, प्राकृतिक आपदाओं और भू-राजनीतिक जोखिम से निपटने के लिए तैयारी करने, आर्थिक विकास के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) को बढ़ावा देने, तथा शांति और स्थिरता के लिए सहयोग करने पर है। इसके अलावा, जापान अपनी विकास एजेंसी, जेआईसीए के माध्यम से आर्थिक सहायता देकर दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश में मातरबारी गहरे समुद्र बंदरगाह के विकास में सहयोग कर रहा है।
हालांकि, बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने शुक्रवार को कहा कि रहमान की जापान यात्रा के दौरान किसी तीसरे देश के मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई। ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, उन्होंने पत्रकारों से कहा, हमने बिल्कुल स्पष्ट कर दिया था... किसी तीसरे देश का कोई जिक्र नहीं हुआ। हम वहां बंगाल की खाड़ी पर चर्चा करने नहीं गए थे, क्योंकि बंगाल की खाड़ी सिर्फ हमारी नहीं है।
इस बीच, 28 अक्टूबर को भारत ने कहा कि वह जापान के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करेगा, जिसमें पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ी पहल भी शामिल होगी। इससे कुछ घंटे पहले ही बांग्लादेश के प्रधानमंत्री रहमान और जापान के प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने क्षेत्रीय संपर्क (कनेक्टिविटी) बढ़ाने पर सहमति जताई थी और बांग्लादेश के मातरबारी गहरे समुद्र बंदरगाह के लिए जापान से अतिरिक्त सहायता प्रदान करने वाले समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नयी दिल्ली में कहा, जापान के साथ हमारी बहुत मजबूत साझेदारी है।
हमारे पास पूर्वोत्तर और जापान से जुड़ी कई पहल भी हैं, और हम इन संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं। नाहिद द्वारा उठाया गया भारत से जुड़ा एक और अहम मुद्दा गंगा जल-बंटवारा संधि का था, जो 12 दिसंबर को समाप्त हो रही है। नाहिद ने चेतावनी दी कि अगर गंगा समझौते का उचित तरीके से नवीनीकरण नहीं किया गया, तो बांग्लादेशी विरोध प्रदर्शन करेंगे।
बीडीन्यूज24 के अनुसार, उन्होंने कहा, इस बार हम गंगा जल संधि में अपने उचित हिस्से का एक इंच भी नहीं छोड़ेंगे।