By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 31, 2026
देश में हालिया आंदोलनों के बाद खासकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग विचारधाराओं में विमर्श की जंग तेज होने के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ नेता ने शनिवार को कहा कि 100 साल से ज्यादा पुराना संगठन राष्ट्रीय विचारों पर विमर्श के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन नये जनसंचार माध्यमों का सही उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने संघ का रुख दोहराते हुए यह भी कहा कि आंदोलनों के दौरान सभी लोगों को सतर्क रहना चाहिए कि देश के हितों के विरोधी तत्व उनका दुरुपयोग न कर पाएं। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर ने इंदौर में संगठन की एक वार्षिक बैठक से दो दिन पहले संवाददाताओं से कहा,‘‘संघ किसी भी जनसंचार माध्यम या इसकी नयी तकनीक का विरोध नहीं करता, लेकिन मनुष्य होने के नाते हमें निश्चित तौर पर विचार करना होता है कि हम इन माध्यमों का उपयोग कैसे करेंगे।
यह गलत सोच है। देश के संदर्भ में अगर कोई व्यक्ति प्रश्न उठाता है, तो ठीक है। वह यह प्रश्न उठा सकता है।’’ आम्बेकर ने आगे कहा,‘‘जैसा कि सरसंघचालक (मोहन भागवत) ने नागपुर में विजयादशमी उत्सव के अपने संबोधन में भी बोला कि सब लोगों को ध्यान रखना चाहिए कि देश में जो भी आंदोलन हों, वे देश के हित में हों और देश को आगे ले जाने के लिए हों, इसलिए सब लोगों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए कि देश के हितों की विरोधी शक्तियां आंदोलनों में प्रवेश करके इनका दुरुपयोग न करने पाएं।’’ उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ इस विषय पर हमेशा ध्यान देता है और आगे भी देता रहेगा।
आम्बेकर ने कहा कि संघ की गतिविधियों में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा,‘‘पिछले वर्ष करीब दो लाख लोग संघ के प्रारंभिक प्रशिक्षण वर्गों में शामिल हुए थे। हम अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिये युवाओं से लगातार संवाद कर रहे हैं।’’ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की एक विवादित नियमावली और इसके परिपत्र पर आम्बेकर ने कहा कि संघ यूजीसी के परिपत्र के बारे में अपनी भूमिका पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह ‘असंतुलित’ था।
उन्होंने कहा,‘‘इस बात की ओर ध्यान दिलाए जाने पर सरकार और यूजीसी ने भी इसका संज्ञान लिया। अदालत ने भी इस (नियमावली) पर रोक लगा दी है। अभी यह मामला अदालत में विचाराधीन है।
हालांकि, हमारा रुख यही है कि इस विषय में आगे जो भी हो, वह संतुलित होना चाहिए और इसका ध्यान सरकार को भी रखना चाहिए।’’ संघ नेता ने कहा कि किसी एक परिपत्र से सामाजिक एकता दिग्भ्रमित नहीं होनी चाहिए और समाज को एकजुट बने रहना चाहिए। केंद्र ने जनवरी के दौरान नये नियम अधिसूचित किए थे जिनके अनुसार सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को भेदभाव की शिकायतों की जांच करने और समानता को बढ़ावा देने के लिए ‘समता समितियां’ गठित करनी होंगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम 2026 में अनिवार्य किया गया है कि इन समितियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), दिव्यांग और महिला सदस्य शामिल होने चाहिए।
आम्बेकर ने एक सवाल पर कहा कि देश भर में एक लाख से ज्यादा दैनिक शाखाएं संचालित करने वाले संघ को पंजीकृत कराए जाने का अभी कोई विचार नहीं है। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में संघ की 13,000 से अधिक नयी शाखाएं शुरू हुई हैं। आम्बेकर ने बताया कि संघ की इंदौर में दो नवंबर से शुरू होने वाली अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में संगठन के प्रमुख भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले समेत 408 पदाधिकारी भाग लेंगे।
आम्बेकर ने कहा कि तीन दिवसीय बैठक में विभिन्न विषयों के साथ संघ की संगठनात्मक रचना में प्रस्तावित बदलावों पर भी चर्चा होगी। अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल, संघ का प्रमुख संगठनात्मक निकाय है। संघ पदाधिकारियों के मुताबिक इस निकाय की बैठक में संगठन की स्थापना के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ ही जनसंचार के नये माध्यमों की सामग्री (कंटेंट), देश में बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप, वैश्विक परिदृश्य और नशीले पदार्थों की समस्या जैसे विषयों पर चर्चा अपेक्षित है।