Bangladesh PM Tariq Rahman की भारत यात्रा में जल्दबाजी नहीं, कबीर ने गिनाईं प्राथमिकताएं

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 23, 2026

बांग्लादेश ने कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा की कोई ‘‘जल्दबाजी’’ नहीं है और ढाका नई दिल्ली के साथ अच्छे संबंध तो चाहता है, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस की एक खबर में यह बात कही गई। खबर के मुताबिक, विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने शनिवार को ढाका में यह बात कही।

इस बहुप्रतीक्षित दौरे को भारत-बांग्लादेश संबंधों को फिर से बेहतर बनाने के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के गिरने के बाद इन संबंधों में गिरावट आई थी। अपनी सरकार गिरने के बाद हसीना भारत आ गई थीं। तब से ढाका उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है, जबकि नई दिल्ली का कहना है कि इस अनुरोध पर कानूनी प्रक्रियाओं के तहत विचार किया जा रहा है।

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सलाहकार और शुक्रवार को मंत्री नियुक्त किए गए कबीर ने कहा, ‘‘हम भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। क्यों नहीं चाहेंगे? वे हमारे पड़ोसी हैं।

हमारे बीच कामकाजी संबंध होने चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन यह सब बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए किया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि किसी भी देश के साथ व्यवहार करते समय ढाका अपने हितों से समझौता नहीं करेगा। रहमान के संभावित भारत यात्रा के समय के बारे में पूछे जाने पर, बीएसएस ने कबीर के हवाले से कहा कि सरकार प्रमुख स्तर की बैठक में जल्दबाजी करने की कोई जरूरत नहीं है। मंत्री ने कहा, ‘‘अगर हम कल अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर किसी समझौते पर पहुंच जाते हैं, तो हम अगले सप्ताह या उसके अगले सप्ताह (भारत) जा सकते हैं।

यहां कोई जल्दबाजी नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि ऐसी यात्रा के लिए दोनों पक्षों के बीच पर्याप्त तैयारी, ठोस बातचीत और जरूरी जमीनी काम की जरूरत होती है। पांच अगस्त को नई दिल्ली में हसीना के वर्चुअल तरीके से मीडियाकर्मियों से बातचीत के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में फिर से तनाव आ गया। इस बातचीत में उन्होंने कहा कि जेल या मौत की सजा के जोखिम के बावजूद, वह दिसंबर में देश लौटने और लोकतंत्र बहाल करके देश को ‘‘सही रास्ते’’ पर लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

बांग्लादेश के एक विशेष अधिकरण ने नवंबर 2025 में हसीना को उनकी गैर-मौजूदगी में मौत की सजा सुनाई थी। यह सजा उन लोगों पर कार्रवाई के दौरान ‘मानवता के खिलाफ कथित अपराधों’ के लिए दी गई थी जो छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा थे, जिसके कारण आखिरकार उन्हें सत्ता से हटना पड़ा था। बांग्लादेश ने इस मीडिया वार्ता पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम से वहां के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और इससे भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिशों पर बुरा असर पड़ सकता है।

वहीं, भारत ने इस कार्यक्रम से खुद को अलग रखने की कोशिश की और कहा कि नई दिल्ली की इसमें कोई भूमिका नहीं थी और न ही उसने हसीना की टिप्पणियों का समर्थन किया। गत पांच अगस्त की मीडिया वार्ता के बाद, ढाका ने उनके प्रत्यर्पण की अपनी मांग दोहराई और इसे रहमान की भारत यात्रा की योजना से भी जोड़ने की कोशिश की। कबीर ने शनिवार को कहा कि ढाका और नई दिल्ली के बीच प्रत्यर्पण संधि है, और हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत का हिस्सा बना हुआ है।

उनकी यह टिप्पणी उसी दिन आई जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि किसी भी रिश्ते के सफल होने के लिए उसे ‘‘आपसी हित’’ की कसौटी पर खरा उतरना होगा। यह बात उन्होंने बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों के संदर्भ में कही थी।

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