By अभिनय आकाश | Jul 29, 2026
प्रधानमंत्री मोदी की इंस्टाग्राम रील्स का क्रेज़ हो या हिट शो F.R.I.E.N.D.S. की ट्यून, बांसुरी स्वराज की वायरल माइक्रो क्लैपिंग से लेकर श्रीकांत शिंदे का 'फोमो' और तो और तेजस्वी सूर्या का 'डेलुलू' वाला तीखा पंच। कुल मिलाकर नीट बवाल और पेपर लीक पर घिरी एनडीए सरकार ने संसद का पूरा माहौल ही बदल डाला! देश भर के युवाओं का गुस्सा सातवें आसमान पर था, तो सरकार ने बैकबेंचर स्टाइल में 'जेन-जी' की पूरी भाषा ही संसद के पटल पर उतार दी। संसद की वही पुरानी, घिसे-पिटे और भारी-भरकम किताबी भाषा को थोड़ी देक के लिए दूर कर एनडीए के युवा ब्रिगेड ने सीधा इंटरनेट का मीम-मसाला लपेटा और ऐसा माहौल बनाया कि गंभीर बहसों के क्लिप्स भी देखते ही देखते युवाओं के इंस्टा फीड और शॉर्ट्स पर वायरल होने लगे!
लोकसभा सांसद बांसुरी स्वराज ने इस विषय पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जेन-जी के स्टाइल में तारीफ की। बांसुरी स्वराज ने कहा कि पीएम मोदी क्लॉक्ड इट इसका मतलब है कि पीएम मोदी ने इस मामले को सही तरह समझा। जेन-जी के स्टाइल में बांसुरी स्वराज ने क्लॉक्ड इट कहकर पीएम की तारीफ की। जेन-जी भी इस शब्द का इस्तेमाल किसी की तारीफ करने के लिए करते हैं। बांसुरी स्वराज ने कहा कि जेन-जी की भाषा में कहूं तो, मुझे कहना होगा कि मोदीजी ने इस कानूनी समाधान को लाकर इसे सही समझा है।
माइक्रो क्लैप तेज़ी से और बार-बार ताली बजाने का एक तरीका है, जिसमें सिर्फ़ उंगलियों के पोरों या हथेलियों के ऊपरी हिस्से को बहुत छोटी और नियंत्रित हरकत के साथ आपस में टकराया जाता है। हाल ही में यह कॉर्पोरेट जगत की एक आदत से बदलकर 'जेन ज़ी' (Gen Z) का एक वायरल इंटरनेट मीम बन गया है। इसमें हाथ एक-दूसरे के बहुत पास रहते हैं और बस एक-दो इंच हिलकर तेज़ी से, बिना आवाज़ के या धीमी आवाज़ में थपथपाने जैसा मूवमेंट करते हैं। इसका इस्तेमाल बिना बोले अपनी बात पर ज़ोर देने या उसे खास बनाने के लिए किया जाता है। यह किसी बात से पूरी तरह सहमत होने, उस पर ज़ोर देने या कोई दमदार बात कहने के बाद माइक ड्रॉप जैसा असर दिखाने का तरीका है। आम तौर पर ज़ोरदार तालियाँ बजाने के उलट, यह तरीका व्यंग्यात्मक, बहुत ज़्यादा ध्यान देने वाला या सहज आत्मविश्वास दिखाने वाला लगता है।
शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने लोकसभा में पेपर लीक विरोधी बिल पर बहस के दौरान विपक्ष का मज़ाक उड़ाने के लिए जेन-जी की स्लैंग का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि छात्रों के शुरुआती विरोध-प्रदर्शनों के दौरान विपक्ष 'Missing In Action' (MIA) यानी गायब था। शिंदे ने दावा किया कि विपक्ष पहले 37 दिनों तक न तो मौजूद था और न ही उनसे संपर्क हो पा रहा था। जब छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ, तो वे जंतर-मंतर भी नहीं गए। उन्होंने कहा कि विपक्ष 'फोमो'की वजह से ऐसा कर रहा था और गलतफहमी में था कि छात्र उनके साथ जुड़ जाएंगे।
विपक्ष के लोग इस डेलुलू में नहीं रहे देश के युवा उनके साथ हैं। देश के युवा आज भी पीएम मोदी के साथ हैं और मैं संसद के माध्यम से युवाओं को कह रहा हूं कि आप युवा लोगों ने जो किया है सौ परसेंट सही किया है। सरकार रिफॉर्म के लिए पूरी तरह से तैयार है। संसद में बोलते हुए सूर्या ने दावा किया कि छात्र विरोध प्रदर्शनों से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश में विपक्ष भ्रमित है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि छात्र राजनीतिक नारों के बजाय ठोस ढांचागत समाधान चाहते हैं।
इस बहस का सीधा असर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों युवा अभ्यर्थियों पर पड़ रहा था। इंटरनेट की आम भाषा (Gen-Z के शब्दों) में बात करना एक सोची-समझी रणनीति थी, ताकि संसद के जटिल और नीरस कानूनों को सोशल मीडिया पर स्क्रॉल कर रहे किशोरों और युवाओं के लिए आसान व प्रासंगिक बनाया जा सके। जान-बूझकर इस्तेमाल किए गए “डेलुलू” जैसे शब्दों और “माइक्रो क्लैप” जैसे इशारों का मकसद ही यही था कि ये इंस्टा रील्स और यूट्यूब शार्ट्स पर झटपट वायरल हो सकें। एनडीए ने इस तरीके से एक गंभीर और बोझिल संसदीय सत्र को सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर होने वाली, युवा-केंद्रित क्लिप्स में सफलतापूर्वक बदल दिया।
इस रणनीति पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने तुरंत जवाब देते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाकई में जेनरेशन Z का समर्थन हासिल करना चाहते हैं, तो कैमरा एंगल बदलने वाले वीडियो से कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवा इंटरनेट पर चल रहे रुझानों के बजाय बेरोजगारी और परीक्षा में धोखाधड़ी जैसी समस्याओं के ठोस संरचनात्मक समाधान चाहते हैं। एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले ने भी सत्ताधारी दलों पर पलटवार करते हुए सदन में प्रचलित बोलचाल की भाषा के इस्तेमाल पर सवाल उठाया और सरकार को चेतावनी दी कि वह युवाओं के भरोसे को लेकर भी भ्रमित न रहे।