By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 14, 2026
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रविवार को कृत्रिम मेधा (एआई) के सिलसिले में एक विशेष कार्ययोजना बनाने तथा उसे केवल एक अलग विषय के रूप में पढ़ाने के बजाय सभी विषयों में शामिल करने पर बल दिया है। वह कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में दो दिवसीय ‘एआई मंथन 2.0’ को संबोधित कर रही थी जो आज संपन्न हो गया। अपने संबोधन में पटेल ने कहा कि एआई मंथन 2.0 के नतीजों को एक कार्ययोजना में बदला जाना चाहिए।
उन्होंने भारतीय प्रतिभा से सुरक्षित डिजिटल बुनियादी ढांचे पर भारतीय आंकड़ों का उपयोग कर स्वदेशी कृत्रिम मेधा विकसित करने का भी आह्वान किया। राज्यपाल ने गणित में कृत्रिम मेधा आधारित समस्या-समाधान, विज्ञान में आंकड़ा विश्लेषण, स्मार्ट खेती और मौसम पूर्वानुमान, बीमारी की शीघ्र पहचान, पर्यावरण निगरानी, यंत्रमानविकी और प्राकृतिक प्रसंस्करण, जैसे कई उदाहरण भी दिए। उन्होंने विश्वविद्यालयों से कहा कि वे विद्यार्थियों को किसानों, जल संरक्षण, यातायात प्रबंधन, कुपोषण, संरक्षण और सहायक तकनीक से जुड़ी वास्तविक समस्याओं को हल करने के लिए कृत्रिम मेधा का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करें।
उन्होंने भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली और आधुनिक कृत्रिम मेधा के बीच संवाद की भी बात कही, जिसमें पांडुलिपियों, भाषाओं, पुरातात्विक विरासत और लोक परंपराओं को संरक्षित करने के लिए तकनीक का उपयोग शामिल है। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षकों और कृत्रिम मेधा के बीच संबंध प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि सहयोग का होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि कृत्रिम मेधा के साथ आंकड़ा निजता, साइबर सुरक्षा, निष्पक्षता, पारदर्शिता और मानवीय समझ भी होनी चाहिए।
उन्होंने “सुरक्षित और भरोसेमंद कृत्रिम मेधा” को देश की कृत्रिम मेधा यात्रा की नींव बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को तकनीकी बदलावों का केवल दर्शक नहीं बने रहना चाहिए, बल्कि उनमें अग्रणी बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि “मंथन समाप्त हो रहा है, लेकिन अभियान शुरू हो रहा है।” राज्यपाल ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू), लखनऊ में आयोजित ‘एआई मंथन 1.0’ से सीएसजेएमयू में हुए दूसरे संस्करण तक हुई प्रगति पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि राज्य के विश्वविद्यालयों में सात लाख से अधिक स्नातक विद्यार्थियों ने कृत्रिम मेधा के बुनियादी पाठ्यक्रम पूरे किए हैं, जबकि तीन लाख से अधिक विद्यार्थियों ने हिंदी माध्यम में साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण लिया है।