By दिव्यांशी भदौरिया | Jan 23, 2026
बसंत पंचमी का त्योहार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। आज शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 का दिन ज्ञान, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस यानी के बसंत पंचमी के रुप में मनाया जाता है। इस दिन मां शारदे को पीले फूले और पीली मिठाईंया अर्पित की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आज का दिन अबूझ मुहूर्त माना जाता है, यानी के बिना पंचांग देखे भी शुभ कार्य विवाह, मुंडन, विद्या आरंभ किए जा सकते हैं। आज शुक्रवार होने से यह दिन लक्ष्मी-सरस्वती योग बना रहा है, जो धन और ज्ञान दोनों की प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ है। आज पूर्व भाद्रपद नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। यह नक्षत्र आध्यात्मिक ऊर्जा और तपस्या का प्रतीक है। हालांकि, पंचक अभी भी प्रभावी है, इसलिए निर्माण कार्य में सावधानी बरतें। आइए जानते हैं बसंत पंचमी का महत्व और आज के अचूक उपाय।
आज का पंचांग 23 जनवरी 2026
तिथि नक्षत्र
पंचमी पूर्व भाद्रपद
आज सूर्य और चंद्रमा का समय 23 जनवरी 2026
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 20 मिनट से 06 बजकर 08 मिनट तक
- अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12 बजकर 00 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक
- गोधुली मुहूर्त - शाम 05 बजकर 55 मिनट से 06 बजकर 22 मिनट तक
- विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 27 मिनट से 03 बजकर 10 मिनट तक
आज का अशुभ मुहूर्त 23 जनवरी 2026
मुहूर्त नाम मुहूर्त समय
- राहु काल सुबह 11 बजकर 05 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक
- यमगंड दोपहर 03 बजकर 12 मिनट से 04 बजकर 35 मिनट तक
- गुलिक काल सुबह 08 बजकर 19 मिनट से 09 बजकर 42 मिनट तक
आज व्रत और त्योहार 23 जनवरी 2026
आज माघ शुक्ल पंचमी है। आज के दिन ऋतुराज बसंत की शुरुआत हो जाती है। धार्मिक मान्यता है कि आज के दिन मां सरस्वती हाथों में वीणा लेकर प्रकट हुई थीं। आज के दिन छोटे बच्चों को अक्षर ज्ञान कराना और पीले वस्त्र धारण करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। शुक्रवार का दिन होने से यह संयोग बताता है कि जिसके पास ज्ञान के साथ-साथ समृद्धि भी स्वयं चलकर आती है। आज पूर्व भाद्रपद नक्षत्र का प्रभाव है जिसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। इस नक्षत्र को द्वि-स्वरूप माना गया है, एक ओर यह सौम्यता दर्शाता है तो दूसरी ओर उग्रता। यह नक्षत्र व्यक्ति को अपनी प्रतिज्ञाओं पर दृढ़ रहने और लक्ष्य के प्रति अडिग रहने की प्रेरणा देता है। बसंत पंचमी जैसे पावन पर्व पर गुरु के नक्षत्र का संयोग विद्यार्थियों के लिए एकाग्रता,बौद्धिक विकास और उच्च शिक्षा के उत्तम योग निर्मित करता है।
पूर्व भाद्रपद नक्षत्र और शुक्रवार का संयोग
ज्योतिष शास्त्र में शुक्रवार और पूर्व भाद्रपद का मिलन कला और अध्यात्म का संगम है। शुक्र भोग विलास और सौंदर्य का कारक है, जबकि पूर्व भाद्रपद तपस्या और वैराग्य का। आज का दिन उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो संगीत, नृत्य, पेंटिंग या लेखन के क्षेत्र में हैं। इतना ही नहीं, मां सरस्वती कला की देवी है और शुक्रवार कला का दिन है। आज की गई साधना या प्रैक्टिस सीधे सिद्धि में बदल जाती है। पंचक और पूर्व भाद्रपद के कारण आज मन में थोड़ा वैराग्य या उदासी भी आ सकती है,जिसे पूजा-पाठ से सकारात्मक ऊर्जा में बदला जा सकता है।
आज का उपाय 23 जनवरी 2026
- आज के दिन मां सरस्वती को पीले फूल और मां लक्ष्मी को गुलाब का इत्र अर्पित करें।
- आज मां सरस्वती और मां लक्ष्मी दोनों देवियों को खीर का भोग लगाएं। इससे ज्ञान और धन दोनों की वृद्धि होगी।
- इस दिन विद्यार्थी अपनी किताबों और पेन पर हल्दी का तिलक लगाएं और ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः का 108 बार जाप करें।
- आज किसी गरीब बच्चे को शिक्षा सामग्री कॉपी-पेन दान करें।
- इस दिन सुहागिन महिलाएं एक-दूसरे को हल्दी कुमकुम लगाएं और पीले वस्त्र धारण करें, इससे दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है।