By नीरज कुमार दुबे | Jan 29, 2026
भारतीय सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक बलों के बैंड समूहों ने आज बीटिंग रिट्रीट समारोह में ‘वंदे मातरम्’, ‘कदम कदम बढ़ाए जा’, ‘विजय भारत’, ‘सितारे हिंद’ और ‘ब्रेव वारियर’ गीत सहित कई मधुर गीतों की धुनें प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। हम आपको बता दें कि बीटिंग रिट्रीट परंपरागत रूप से हर साल गणतंत्र दिवस समारोह के समापन का प्रतीक होता है। इस वर्ष, समारोह के लिए बैठने के स्थानों का नाम भारतीय वाद्ययंत्रों जैसे 'बांसुरी', 'डमरू', 'एकतारा', 'एसराज', 'मृदंगम', 'नगाड़ा', 'पखावज', 'संतूर', 'सारंगी', 'सरिंदा', 'सरोद', 'शहनाई', 'सितार', 'सुरबहार', 'तबला' और 'वीणा' के नाम पर रखा गया। कर्तव्य पथ पर इस वर्ष आयोजित औपचारिक परेड और इससे संबंधित अन्य समारोहों का प्रमुख विषय राष्ट्र गीत 'वंदे मातरम्' की डेढ़ सौवीं वर्षगांठ रही। इस तरह इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह राष्ट्र गीत के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न भी रहा।
हम आपको बता दें कि बीटिंग रिट्रीट हर वर्ष 29 जनवरी की शाम को नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित होता है। 26 जनवरी की सैन्य शक्ति प्रदर्शन के बाद यह आयोजन शांति, अनुशासन और गौरव का प्रतीक बनकर उभरता है। हम आपको बता दें कि बीटिंग रिट्रीट का मूल विचार सत्रहवीं सदी के इंग्लैंड से आया था जब सूर्यास्त के समय सैनिक टुकड़ियों को वापस बुलाने के लिए नगाडा या ड्रम बजाया जाता था। भारत में इसकी शुरुआत स्वतंत्रता के बाद 1950 के दशक में हुई और तब से यह समारोह भारतीय सशस्त्र बलों की गरिमा और परंपरा का अटूट हिस्सा बन गया।
आज कर्तव्य पथ पर सूर्य ढलते ही देश ने अनुशासन और संगीत का विराट संगम देखा। राष्ट्रपति के आगमन के साथ ही माहौल में गंभीरता और गर्व की लहर दौड़ गई। देखा जाये तो बीटिंग रिट्रीट भारत की सैन्य चेतना का घोष है। यह बताता है कि भारत युद्धप्रिय नहीं पर युद्ध के लिए हर पल तैयार है। जहां गणतंत्र दिवस पर हथियारों की गर्जना दिखती है वहीं बीटिंग रिट्रीट पर अनुशासन की शांति बोलती है। यही संतुलन भारत को सबसे अलग बनाता है।