Child Marriage पर Bengal सरकार सख्त, दोषियों पर POCSO और कल्याणकारी लाभ रोकने का फैसला

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 07, 2026

कोलकाता, सात सितंबर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को राज्यभर में बाल विवाह के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान किया और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी, जेल की सजा तथा सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ वापस लेने की चेतावनी दी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने नाबालिगों के विवाह एवं कम उम्र में गर्भधारण के मामलों की पहचान के लिए घर-घर अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि नाबालिगों से विवाह करने वालों के साथ-साथ ऐसे विवाह करने या संपन्न कराने में मदद करने वाले लोगों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 एवं पॉक्सो अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

शुभेंदु ने कहा, “पुलिस कार्रवाई शुरू की जाएगी और गिरफ्तारियां की जाएंगी।” उन्होंने समस्या की गंभीरता और इसे लागू करने के लिए आवश्यक व्यापक स्तर की कार्रवाई पर जोर दिया। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि केवल छह महीनों में-एक जनवरी से 30 जून के बीच-नाबालिग लड़कियों के लगभग 60,000 संस्थागत प्रसव हुए। इस आंकड़े का मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया।

उन्होंने आंकड़ों का विवरण देते हुए कहा कि अकेले मुर्शिदाबाद जिले में नाबालिग लड़कियों के 12,847 संस्थागत प्रसव किए गए हैं, जबकि दक्षिण 24 परगना में यह संख्या 4,178 रही। शुभेंदु ने कहा कि पश्चिम बंगाल देश में बाल विवाह और 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों से जुड़े प्रसव के मामलों में सबसे आगे है। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की किसी भी लड़की के गर्भवती होने और बच्चे को जन्म देने के प्रत्येक मामले की सूचना देना अनिवार्य होगा।

इससे अधिकारियों को संदिग्ध बाल विवाह के मामलों की पहचान करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने पंडितों, काजियों और नाबालिगों के विवाह संपन्न कराने या उन्हें इसमें मदद करने वाले अन्य लोगों को भी कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में शामिल पाए जाने वालों को कानून के तहत जेल और जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत बाल विवाह को बढ़ावा देने, इसकी अनुमति देने या इसे संपन्न कराने में शामिल लोगों के लिए दो साल तक की कैद और/या एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। शुभेंदु ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम भी सख्ती से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाना अपराध है, भले ही वह विवाहित हो।

मुख्यमंत्री ने कहा, “पुलिस कार्रवाई शुरू की जाएगी और गिरफ्तारियां की जाएंगी।” उन्होंने रेखांकित किया कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाने पर पॉक्सो के प्रावधान लागू होते हैं, जिनके तहत 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और यहां तक कि मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है। शुभेंदु ने कहा कि नाबालिगों के गर्भधारण से जुड़े मामलों में विशेष रूप से कड़ी जांच और कार्रवाई की जाएगी। प्रस्तावित इस सख्त अभियान में पुलिस तथा स्वास्थ्य, समाज कल्याण विभागों और जिला प्रशासन के बीच समन्वय पर काफी जोर दिया जाएगा।

नाबालिगों के गर्भधारण और संस्थागत प्रसव से जुड़े स्वास्थ्य रिकॉर्ड का इस्तेमाल संवेदनशील मामलों की पहचान करने के लिए किया जाएगा। यह कदम कई जिलों में बाल विवाह को लेकर जारी चिंताओं के बीच उठाया गया है। खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर और सीमावर्ती इलाकों में कम उम्र में शादी, किशोरावस्था में गर्भधारण और स्कूल छोड़ने की घटनाएं आपस में जुड़ी सामाजिक समस्याएं बनी हुई हैं।

राज्य में इस मुद्दे का विशेष महत्व है, क्योंकि 19वीं सदी के समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने बाल विवाह के खिलाफ और महिलाओं की शिक्षा के समर्थन में अभियान चलाया था। शुभेंदु ने यह भी आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने बाल विवाह और नाबालिगों के प्रसव से जुड़े आंकड़े केंद्र के साथ साझा नहीं किए थे। मुख्यमंत्री की यह घोषणा कानून लागू करने पर आधारित दृष्टिकोण की ओर एक बड़ा बदलाव दर्शाती है।

सरकार का लक्ष्य नाबालिगों की शादी कराने वाले परिवारों के अलावा पतियों, विवाह कराने में मदद करने वालों और विवाह समारोह संपन्न कराने वाले लोगों को भी कार्रवाई के दायरे में लाना है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का संदेश स्पष्ट है: बाल विवाह को अब केवल एक सामाजिक प्रथा के रूप में नहीं देखा जाएगा, बल्कि इसे ऐसा आपराधिक कृत्य माना जाएगा, जिस पर पुलिस कार्रवाई, मुकदमा और दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।

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