भारत में 2014-19 के बीच राजद्रोह के 326 मामले दर्ज हुए, महज छह लोगों को मिली सजा

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 18, 2021

नयी दिल्ली। राजद्रोह पर औपनिवेशिक काल के विवादित दंडात्मक कानून के तहत 2014 से 2019 के बीच 326 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से महज छह लोगों को सजा दी गई। उच्चतम न्यायालय ने पिछले हफ्ते कहा था कि आईपीसी की धारा 124 (ए) --राजद्रोह के अपराध-- का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया और उसने केंद्र से पूछा कि वह अंग्रेजों द्वारा आजादी आंदोलन को दबाने के लिए महात्मा गांधी जैसे लोगों को ‘‘चुप’’ कराने के लिए इस्तेमाल किए गए प्रावधानों को खत्म क्यों नहीं कर रही है।

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हरियाणा में राजद्रोह कानून के तहत 31 मामले दर्ज किए गए जिनमें से 19 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गए और छह मामलों में सुनवाई पूरी हुई जिनमें महज एक व्यक्ति की दोषसिद्धि हुई। बिहार, जम्मू कश्मीर और केरल में 25-25 मामले दर्ज किए गए। बिहार और केरल में किसी भी मामले में आरोप पत्र दाखिल नहीं किए जा सके जबकि जम्मू कश्मीर में तीन मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गए। हालांकि तीनों राज्यों में 2014 से 2019 के बीच किसी भी मामले में किसी को भी दोषी नहीं ठहराया गया। कर्नाटक में राजद्रोह के 22 मामले दर्ज किए गए जिनमें 17 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गए लेकिन सिर्फ एक मामले में सुनवाई पूरी की जा सकी। हालांकि, इस अवधि में किसी भी मामले में किसी को भी दोषी नहीं ठहराया गया।

उत्तर प्रदेश में 2014 और 2019 के बीच राजद्रोह के 17 मामले दर्ज किए गए और पश्चिम बंगाल में आठ मामले दर्ज किए गए। उत्तर प्रदेश में आठ और पश्चिम बंगाल में पांच मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गए लेकिन दोनों राज्यों में किसी को भी दोषी नहीं ठहराया गया। दिल्ली में 2014 और 2019 के बीच राजद्रोह के चार मामले दर्ज किए गए लेकिन किसी भी मामले में आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया। मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, सिक्किम, अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप, पुडुचेरी, चंडीगढ़, दमन और दीव, दादरा और नागर हवेली में छह वर्षों में राजद्रोह का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया।

तीन राज्यों महाराष्ट्र, पंजाब और उत्तराखंड में राजद्रोह का एक-एक मामला दर्ज किया गया। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में 2019 में सबसे अधिक राजद्रोह के 93 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद 2018 में 70, 2017 में 51, 2014 में 47, 2016 में 35 और 2015 में 30 मामले दर्ज किए गए। देश में 2019 में राजद्रोह कानून के तहत 40 आरोपपत्र दाखिल किए गए जबकि 2018 में 38, 2017 में 27, 2016 में 16, 2014 में 14 और 2015 में छह मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गए। जिन छह लोगों को दोषी ठहराया गया, उनमें से दो को 2018 में तथा एक-एक व्यक्ति को 2019, 2017, 2016 और 2014 में सजा सुनाई गई। साल 2015 में किसी को भी दोषी नहीं ठहराया गया।

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