Bharat Tiwari Encounter Controversy | गैंगस्टर या जनता की आवाज़? बिहार में हुई इस मौत पर क्यों उबला देश, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

By रेनू तिवारी | Jun 23, 2026

बिहार के भोजपुर जिले में हुए एक पुलिस एनकाउंटर ने पूरे देश में एक नया राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है। 17 जून को एक कथित पुलिस मुठभेड़ में भोजपुर के बिलौटी गाँव के रहने वाले 26 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई। इस घटना के बाद से ही बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ जहाँ पुलिस उसे अपराधी बता रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय जनता और परिवार उसे जन-मुद्दे उठाने वाला 'मसीहा' करार दे रहे हैं। इस एनकाउंटर की गूँज अब देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) तक पहुँच चुकी है, जिससे यह मामला बेहद संवेदनशील हो गया है।

हालांकि, तिवारी के परिवार ने पुलिस के इस बयान का कड़ा विरोध किया है। उनका आरोप है कि गोलीबारी होने से पहले ही उसने सरेंडर कर दिया था और अपना हथियार फेंक दिया था। परिवार का यह भी दावा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि जब पुलिस ने उस पर गोली चलाई, तब तिवारी निहत्था था।

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें मांग की गई है कि बिहार में पुलिस एनकाउंटर में भरत भूषण तिवारी की कथित "एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग" (न्यायेतर हत्या) की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाई जाए।

याचिका में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से जांच की भी मांग की गई है। इसमें तर्क दिया गया है कि एनकाउंटर से जुड़ी परिस्थितियों को देखते हुए इसकी तुरंत, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

कौन थे भरत तिवारी?

भरत भूषण तिवारी भोजपुर के शाहपुर इलाके के बिलौटी गाँव के रहने वाले थे और सोशल मीडिया के ज़रिए जन-मुद्दे उठाने के लिए स्थानीय स्तर पर जाने जाते थे। वे अक्सर बाढ़, नदी के कटाव, विस्थापन और स्थानीय समुदायों की परेशानियों से जुड़े मुद्दों को उठाते थे।

उनके परिवार के मुताबिक, तिवारी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और वे इलाके के लोगों को प्रभावित करने वाले नागरिक और पर्यावरणीय मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए फ़ेसबुक जैसे प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने उन्हें एक सामाजिक कार्यकर्ता बताया जो समाज के गरीब और वंचित वर्गों के कल्याण के लिए काम करते थे।

पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई

एनकाउंटर को लेकर बढ़ते विवाद के बीच, कई पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एडिशनल डायरेक्टर जनरल (ADG) सुधांशु कुमार ने कहा कि एनकाउंटर से एक दिन पहले, 16 जून को पुलिस की एक टीम तिवारी से बात करने गई थी, लेकिन वे स्थिति को सही ढंग से नहीं संभाल पाए। कुमार ने कहा, "लापरवाही के आरोप में एक स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO), दो सब-इंस्पेक्टर (SI), एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) और एक कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है।"

उन्होंने आगे बताया कि शाहाबाद रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) को इस मामले की जांच करने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, बिहार पुलिस ने इस मामले की जांच हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज से कराने का फैसला किया है। इस घटना के सिलसिले में पहले ही दो FIR दर्ज की जा चुकी हैं।

भरत तिवारी की मां ने क्या कहा

भरत तिवारी की मां, आशा देवी ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को दो बार गोली मारी गई और कहा कि उन्हें उनके समाज सेवा के काम की वजह से निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा, "मेरे बेटे को दो गोलियां लगीं। वह बहुत अच्छे इंसान थे। वह समाज के लिए काम करते थे और गरीबों के लिए मसीहा थे। उनकी हत्या उनके समाज सेवा के कामों की वजह से की गई।"

एक सीनियर पुलिस अधिकारी को जिम्मेदार ठहराते हुए आशा देवी ने कहा, "मैं इस आदेश के लिए DSP को जिम्मेदार मानती हूं और मांग करती हूं कि उन्हें मौत की सजा दी जाए। न्याय के लिए हमारी गुहार कोई नहीं सुन रहा है।"

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