By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 25, 2026
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी और उसके पूर्व प्रवर्तकों के लेन-देन की जांच (फॉरेंसिक ऑडिट) संबंधी आदेश को चुनौती दी गई थी। यह जांच कथित तौर पर जापानी दवा कंपनी दाइची सैंक्यो के हक में निर्गत 3,500 करोड़ रुपये के हर्जाने से जुड़ी है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 31 अगस्त को फोर्टिस और उसके पूर्व प्रवर्तकों - मलविंदर मोहन सिंह तथा शिविंदर मोहन सिंह - के लेन-देन की जांच कराने का आदेश दिया था।
वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने अदालत के समक्ष दलील दी कि उनके मुवक्किल को न तो कभी इस मामले में पक्षकार बनाया गया और न ही मध्यस्थ बनाया गया, लेकिन फिर भी उसके साथ ऋणी के रूप में व्यवहार किया जा रहा है। इस याचिका में दिल्ली उच्च न्यायालय के 31 अगस्त को दिए गए उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जो ‘दाइची सैंक्यो कंपनी लिमिटेड बनाम मलविंदर मोहन सिंह एवं अन्य’ मामले में पारित किया गया था। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में दाइची की उस अर्जी को मंजूर किया था, जिसमें फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड (एफएचएल), सिंह बंधुओं और अन्य के बीच हुए लेनदेन की जांच के लिए ‘फॉरेंसिक ऑडिटर’ नियुक्त करने की अपील की गई थी।
अदालत ने फॉरेंसिक ऑडिट के लिए एस. रामानंद अय्यर एंड कंपनी को नियुक्त किया था और छह महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया था।