Bhimsen Joshi Birth Anniversary: भीमसेन जोशी ने 19 साल की उम्र में दी थी पहली प्रस्तुति, गुरु की तलाश में छोड़ दिया था घर

By अनन्या मिश्रा | Feb 04, 2025

जब भी बात भारतीय संगीत की होती है, तो ऐसे तमाम बड़े नाम हैं जो किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। इन्हीं में से एक नाम पंडित भीमसेन जोशी का है। पंडित भीमसेन जोशी ने संगीत के क्षेत्र में भारत का कद दुनियाभर में बढ़ाने का काम किया है। वह किराना घराने के शास्त्रीय गायक थे। आज ही के दिन यानी की 04 फरवरी को पंडित भीमसेन जोशी का जन्म हुआ था। पंडित भीमसेन जोशी को ''पिया मिलन की आस', 'जो भजे हरि को सदा' और 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' जैसे गानों के लिए आज भी याद किया जाता है। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर पंडित भीमसेन के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...


जन्म और परिवार

कर्नाटक के गडग में 04 फरवरी 1922 को भीमसेन जोशी का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम गुरुराज जोशी था, जोकि स्थानीय हाई स्कूल में हेडमास्टर और अंग्रेजी, कन्नड और संस्कृत के विद्वान थे। बचपन में ही भीमसेन जोशी के सिर से मां का साया उठ गया था। जिसके बाद उनका पालन-पोषण सौतेली मां ने किया था। भीमसेन जोशी को बचपन से ही संगीत का काफी शौक था।

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कम उम्र में छोड़ दिया था घर

बता दें कि किराना घराने के संस्थापक अब्दुल करीम खान से भीमसेन जोशी बचपन से ही बेहद प्रभावित थे। वह जिस रास्ते से स्कूल जाते थे, उस रास्ते पर एक ग्रोमोफोन शॉप थी। इस दौरान ग्राहकों को सुनाए जा रहे गानों को सुनने के लिए भीमसेन भी वहां पर खड़े हो जाते थे। एक दिन भीमसेन ने अब्दुल करीम खान का गाया 'राग वसंत' में 'फगवा' 'बृज देखन को' और 'पिया बिना नहि आवत चैन' ठुमरी सुना। जिसके बाद भीमसेन के मन में संगीत के प्रति रुचि अधिक बढ़ गई।


फिर एक दिन भीमसेन जोशी गुरु की तलाश में घर छोड़कर निकल गए। जिसके बाद वह अगले दो सालों तक बीजापुर, पुणे और ग्वालियर में रहे। इस दौरान उनकी उम्र महज 11 साल थी। ग्वालियर में उन्होंने उस्ताद हाफिज अली खान से संगीत की शिक्षा ली। इसके बाद उन्होंने अब्दुल करीम खान के शिष्य पंडित रामभाऊ कुंडालकर से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली। वहीं साल 1936 में वह एक जाने-माने गायक बन गए थे। उन्होंने खयाल के साथ भजन और ठुमरी में महारत हासिल की थी।


पहली प्रस्तुति

साल 1941 में महज 19 साल की उम्र में पंडित भीमसेन जोशी ने मंच पर अपनी पहली प्रस्तुति दी थी। वहीं 20 साल की उम्र में उनका पहला एल्बम निकला था। जिसमें हिंदी और कन्नड़ में कुछ धार्मित गीत थे। इसके अलावा पंडित भीमसेन जोशी ने अपनी गायिकी के दम पर फ्री में यात्रा भी की है। वहीं संगीत में अहम योगदान के लिए पंडित भीमसेन जोशी को 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था। इसके साथ ही उनको पद्म भूषण, पद्म विभूषण समेत अन्य कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।


मृत्यु

बता दें कि लंबी बीमारी के बाद 24 जनवरी 2011 को पंडित भीमसेन जोशी का निधन हो गया था।

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