IIMs में लौटा सुनहरा दौर, बैन और मैकिन्से जैसी बड़े फर्मों ने बढ़ाई हायरिंग और सैलरी।

By Ankit Jaiswal | Jan 07, 2026

कैम्पस प्लेसमेंट के मौसम में इस बार कुछ अलग नज़ारा दिख रहा है। बता दें कि देश के शीर्ष प्रबंधन संस्थानों, खासकर भारतीय प्रबंधन संस्थानों में कंसल्टिंग और फाइनेंस कंपनियों की मौजूदगी फिर से तेज़ हो गई है। यह उछाल ऐसे समय में देखने को मिल रहा है, जब वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के चलते कई बड़ी कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या घटाने की खबरें सामने आई हैं।


मौजूद जानकारी के अनुसार, आईआईएम कोझिकोड के निदेशक देबाशीष चटर्जी ने बताया कि अंतिम प्लेसमेंट प्रक्रिया में अब तक 594 में से 492 छात्रों को ऑफर मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धी माहौल के बावजूद प्लेसमेंट की रफ्तार स्थिर बनी हुई है। गौरतलब है कि इस वर्ष कंसल्टिंग भूमिकाओं में लगभग 60 प्रतिशत और फाइनेंस से जुड़े ऑफर्स में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।


चटर्जी के अनुसार, इस उछाल की बड़ी वजह भारत में जटिल और एआई-संचालित वैश्विक कार्यों की बढ़ती भूमिका है। बड़ी संख्या में ऑफर्स अब रणनीतिक और उच्च प्रभाव वाली टीमों से जुड़े हैं, क्योंकि भारत से संचालित होने वाला वैश्विक कार्यभार लगातार बढ़ रहा है।


गौरतलब है कि कंसल्टिंग, बैंकिंग और एडवाइजरी फर्में हमेशा से बी-स्कूल छात्रों की पहली पसंद रही हैं। हालांकि, 2024 बैच के दौरान वैश्विक सुस्ती का असर भर्ती पर पड़ा था, लेकिन अगले बैच में इन क्षेत्रों की मांग फिर से तेज़ होती दिख रही है। बैन एंड कंपनी, बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप, मैकिन्से, एक्सेंचर के साथ-साथ जनरल अटलांटिक और टेमासेक होल्डिंग्स जैसी निवेश कंपनियां आक्रामक रूप से भर्तियां करने की तैयारी में हैं।


बैन के पार्टनर प्रभव कश्यप ने कहा कि भारत उनकी प्राथमिकता बना हुआ है और भविष्य की रणनीति के लिए सही प्रतिभा में निवेश किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि आईआईएम जैसे संस्थानों से निकलने वाले छात्र भविष्य के लिए मजबूत टीम तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं।


एक्सेंचर की भर्ती रणनीति भी ग्राहकों की एआई आधारित रणनीति और बड़े पैमाने पर बदलाव की मांग को दर्शाती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 तक के 12 महीनों में एक्सेंचर ने 4.78 अरब डॉलर का नया कारोबार जोड़ा, जो भारत की शीर्ष आईटी कंपनियों की संयुक्त वृद्धि से भी अधिक है। वहीं, सिंगापुर की टेमासेक के लिए भी भारत एक प्रमुख बाजार है और जुलाई 2025 में भारत पोर्टफोलियो के साथ उसके एसेट्स अंडर मैनेजमेंट 50 अरब डॉलर तक पहुंच गए हैं।


प्लेसमेंट से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, कंसल्टिंग और फाइनेंस फर्मों द्वारा दी जा रही मीडियन सैलरी में 10 से 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। पुराने आईआईएम में यह आंकड़ा 30 से 35 लाख रुपये के आसपास बना हुआ है।


आईआईएम इंदौर ने भी 2026 बैच के लिए कंसल्टिंग और फाइनेंस कंपनियों की बढ़ी दिलचस्पी की पुष्टि की है। निदेशक हिमांशु राय ने बताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में भर्ती बनी हुई है, क्योंकि यहां ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का विस्तार हो रहा है और भारत कार्यालय एंड-टू-एंड डिलीवरी तथा एनालिटिक्स आधारित प्रोजेक्ट्स में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।


हालांकि, यह भी उल्लेखनीय है कि नवंबर में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक मैकिन्से ने एआई आधारित ऑटोमेशन के चलते करीब 200 पदों में कटौती की थी। इसके बावजूद, भारत में कैंपस हायरिंग पर इसका खास असर नहीं दिख रहा है।


आईआईएम अहमदाबाद, बेंगलुरु और कलकत्ता जैसे पुराने संस्थानों में अंतिम प्लेसमेंट आमतौर पर जनवरी के अंत या फरवरी की शुरुआत में होते हैं। आईआईएम अहमदाबाद के प्लेसमेंट चेयर विस्वनाथ पिंगली के अनुसार, इस साल का माहौल पिछले कुछ वर्षों की तुलना में बेहतर नजर आ रहा है और कंसल्टिंग व फाइनेंस कंपनियों की भागीदारी मजबूत बनी हुई है।


समर इंटर्नशिप के दौरान भी कंसल्टिंग कंपनियों की मांग साफ दिखी है। आईआईएम बेंगलुरु में 2027 बैच की समर इंटर्नशिप में मैनेजमेंट कंसल्टिंग का हिस्सा 46 प्रतिशत रहा है। कोझिकोड ने भी 2026 बैच में प्री-प्लेसमेंट ऑफर्स में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है।


वहीं, इंजीनियरिंग संस्थानों की बात करें तो आईआईटी में एआई आधारित भूमिकाओं के लिए अलग तरह की कंपनियां पहुंचीं हैं। हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स, स्टार्टअप्स, एजेंटिक एआई फर्मों के साथ टेस्ला, एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया, एयरबस और बोइंग जैसी दिग्गज कंपनियां भी भर्ती के लिए मैदान में उतरी हैं। कुल मिलाकर, एआई के दौर में भारत के शीर्ष शैक्षणिक संस्थान वैश्विक प्रतिभा आपूर्ति के केंद्र के रूप में और मजबूत होते दिख रहे हैं।

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