By रेनू तिवारी | Jul 16, 2026
आयकर विभाग ने टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देते हुए चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (Cost Inflation Index - CII) बढ़ा दिया है। इस सूचकांक का उपयोग अचल संपत्ति (जैसे मकान, जमीन), प्रतिभूतियों (Securities) और सोने-चांदी के आभूषणों (Jewelry) की बिक्री पर होने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (Long Term Capital Gains - LTCG) की गणना के लिए किया जाता है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए लागत मुद्रास्फीति सूचकांक को 384 निर्धारित किया गया है। गौरतलब है कि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में यह सूचकांक 376 था।
उन्होंने कहा कि इससे करदाताओं, मूल्यांकनकर्ताओं और कर विशेषज्ञों को सूचीकृत लागत की गणना में स्पष्टता मिलती है और व्याख्या से जुड़े विवाद कम होते हैं। लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (सीआईआई) की अधिसूचना आयकर अधिनियम, 1961 के तहत हर वर्ष जारी की जाती है। इसका उपयोग किसी पूंजीगत परिसंपत्ति की बिक्री पर पूंजीगत लाभ की गणना करते समय ‘सूचकांकित अधिग्रहण लागत’ (इंडेक्स्ड कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन) निर्धारित करने के लिए किया जाता है।
टैक्सपेयर्स के लिए क्यों जरूरी है CII और इंडेक्सेशन?
जब आप कोई पुरानी संपत्ति बेचते हैं, तो उस पर होने वाले मुनाफे पर टैक्स लगता है। चूंकि समय के साथ महंगाई (मुद्रास्फीति) बढ़ती है और पैसे की क्रय शक्ति (Purchasing Power) कम होती है, इसलिए सरकार करदाताओं को 'इंडेक्सेशन' (Indexation) का लाभ देती है। इसके तहत CII का उपयोग करके संपत्ति के खरीद मूल्य को आज की महंगाई के हिसाब से बढ़ा दिया जाता है (Indexed Cost of Acquisition)। खरीद मूल्य बढ़ने से कर योग्य मुनाफा (LTCG) कम हो जाता है, जिससे करदाता को कम टैक्स देना पड़ता है।
कब लागू होता है दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG)?
किसी भी संपत्ति को 'दीर्घकालिक पूंजीगत परिसंपत्ति' (Long-Term Capital Asset) मानने के लिए उसे एक निश्चित अवधि तक अपने पास रखना जरूरी होता है:
अचल संपत्ति और गैर-सूचीबद्ध शेयर: न्यूनतम 24 महीने।
सूचीबद्ध प्रतिभूतियां (Listed Securities): न्यूनतम 12 महीने।
अन्य परिसंपत्तियां (जैसे आभूषण): न्यूनतम 36 महीने।
विशेषज्ञों की राय: विवादों में आएगी कमी
इस अधिसूचना पर प्रतिक्रिया देते हुए एएमआरजी ग्लोबल के प्रबंध भागीदार (Managing Partner) रजत मोहन ने कहा, "लागत मुद्रास्फीति सूचकांक की यह वार्षिक अधिसूचना यह दर्शाती है कि नई कर व्यवस्था के तहत जहां भी सूचकांकण (इंडेक्सेशन) का लाभ जारी है, वहां सरकार मुद्रास्फीति समायोजन की निष्पक्ष व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।"
उन्होंने आगे कहा कि इस स्पष्टता से करदाताओं, मूल्यांकनकर्ताओं और कर विशेषज्ञों को सूचीकृत लागत (Indexed Cost) की गणना करने में बहुत आसानी होगी, जिससे नियमों की अलग-अलग व्याख्या करने से जुड़े टैक्स विवाद काफी हद तक कम होंगे।
बता दें कि आयकर अधिनियम, 1961 के तहत हर साल सरकार द्वारा यह नोटिफिकेशन जारी किया जाता है, ताकि करदाता अपनी संपत्तियों की बिक्री पर महंगाई के प्रभाव को समायोजित कर सही टैक्स का आकलन कर सकें।