By अभिनय आकाश | Jul 16, 2026
अयोध्या पुलिस बुधवार को चंदा गबन मामले के मुख्य आरोपियों में से एक, रमाशंकर मिश्रा को उस किराए के घर ले गई जहाँ वह अयोध्या में रहता था और घर में रखे एक बैग से ज़मीन से जुड़े ज़रूरी दस्तावेज़ बरामद किए। पुलिस ने घर को सील कर दिया और किराए के घर में लगे CCTV कैमरे का डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर भी ज़ब्त कर लिया। जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने के लिए दस्तावेज़ों की जांच कर रही हैं कि क्या उनका इस मामले से कोई संबंध है। मिश्रा और एक अन्य आरोपी सुभाष श्रीवास्तव से जुड़ी जगहों पर भी तलाशी ली गई। मेडिकल जांच के बाद दोनों को अयोध्या ज़िला जेल से स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) के दफ़्तर लाया गया, जहां उनसे लगभग 14 घंटे तक पूछताछ की गई। श्रीवास्तव मंदिर में कैश गिनने के काम की देखरेख करते थे, और मिश्रा मंदिर से सील किए गए दान के बक्से गिनती केंद्र तक पहुंचाते थे। ये दोनों इस मामले में गिरफ़्तार किए गए 8 लोगों में शामिल हैं।
श्रीवास्तव पर सख्ती बढ़ाते हुए पुलिस का आरोप है कि उन्होंने कथित गबन को अंजाम देने के लिए कैश-गिनने की प्रक्रिया की कमियों का फायदा उठाया। हालांकि, अभी तक उनसे कोई कैश बरामद नहीं हुआ है, लेकिन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती जांच में उनकी भूमिका सामने आई है। SIT ने मंदिर के दान प्रबंधन सिस्टम में प्रक्रिया और निगरानी से जुड़ी गंभीर खामियों की पहचान की थी।
इससे पहले, सह-आरोपी अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे से हिरासत में पूछताछ के दौरान, जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर गलत तरीके से लिए गए डोनेशन के पैसे से खरीदी गई दो SUV बरामद कीं। इसके अलावा, नकद, सोने के गहने और निवेश से जुड़े दस्तावेज़ भी मिले। आगे की जांच से यह भी पता चला है कि डोनेशन घोटाले के पैसे का कुछ हिस्सा स्टॉक मार्केट में लगाया गया था और निजी तौर पर उधार देने में इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद, पैसे के असली स्रोत को छिपाने के लिए इसे बैंकिंग चैनलों के ज़रिए घुमाया गया।