By अंकित सिंह | Jul 12, 2024
बिहार में पुल ताश के पत्तों की तरह एक के बाद एक ढह रहे हैं - कुछ बिल्कुल नए और कुछ अभी भी निर्माण चरण में हैं। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है, बिहार हमेशा से ही पुल टूटने के मामले में कुख्यात रहा है। अभी कुछ साल पहले ही भागलपुर में गंगा पर बना नया पुल टूट गया था। भारी मॉनसून के अलावा बिहार में पुल गिरने के और भी बहाने सामने आ रहे हैं। खुद नीतीश कुमार ने गहन जांच के निर्देश दिया है। फिलहाल इसको लेकर राजनीति भी खूब हो रही है।
इससे पहले बिहार सरकार ने शुक्रवार को राज्य में पिछले कुछ दिनों में कई पुलों के ध्वस्त होने की घटनाओं के सिलसिले में 14 अभियंताओं को निलंबित कर दिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। जांच समिति द्वारा जल संसाधन विभाग को जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद यह निर्णय लिया गया। जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद ने यहां संवाददाताओं से कहा कि जांच में अभियंता लापरवाह और निगरानी को अप्रभावी पाया गया जिसके कारण राज्य में कई छोटे पुल ढह गए।
वहीं, बिहार के मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने बिहार में पुल ढहने की हालिया घटनाओं के लिए पूर्व राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि केवल राजद कार्यकाल के दौरान बनाए गए पुल ही टूट रहे हैं। कुमार ने कहा कि राजद कार्यकाल के दौरान बने पुल टूट रहे हैं। उन्होंने पुलों का निर्माण तो किया लेकिन रखरखाव की कोई नीति नहीं बनाई। हम जल्द ही एक रखरखाव नीति लाएंगे। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को कहा कि जांच जारी है और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मैं एक-एक चीज की जांच करा रहा हूं।' मैंने त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिये हैं।