By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 12, 2026
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में राजधानी पटना के गर्दनीबाग में राज्य का पहला टेक पार्क विकसित करने के लिए एनबीसीसी (इंडिया) से साथ समझौता (एमओयू) करने को मंजूरी दी गई। सरकार को उम्मीद है कि इस परियोजना से 5,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे और 100 से अधिक कंपनियां निवेश के लिए आकर्षित होंगी। बिहार सरकार के सूचना प्रावैधिकी विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार, मंत्रिमंडल ने बिहार वित्त (संशोधन) नियमावली, के तहत नामांकन के आधार पर एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड का चयन करने की स्वीकृति प्रदान की है।
यह परियोजना आईटी, आईटीईएस तथा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण (ईएसडीएम) क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने में भी सहायक होगी। सरकार को उम्मीद है कि बिहार आईटी नीति, 2024 और बिहार वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) नीति, 2026 के तहत टेक पार्क के विकास से निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। बयान के मुताबिक, टेक पार्क में 100 से अधिक कंपनियों के निवेश करने की संभावना है।
इससे 5,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं। परियोजना का प्रमुख उद्देश्य राज्य के प्रतिभाशाली युवाओं को राज्य में ही रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर उनके पलायन को कम करना है। मंत्रिमंडल ने दरभंगा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास लॉजिस्टिक पार्क और कार्गो केंद्र विकसित करने के लिए 49.9973 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को 225 करोड़ रुपये की संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की।
इससे पहले 50 एकड़ भूमि के अधिग्रहण के लिए 138 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। भूमि मुआवजे की गणना में वृद्धि के कारण अतिरिक्त राशि की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना से मिथिलांचल और उत्तर बिहार के कृषि उत्पादों को हवाई मार्ग से देश के अन्य राज्यों तथा विभिन्न बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मंत्रिमंडल ने ग्रामीण कार्य विभाग की सड़कों के रखरखाव के लिए ग्रामीण सड़क अनुरक्षण एवं प्रबंधन कार्यक्रम (आरआरआरएमपी) लागू करने का निर्णय लिया। इसके तहत उन ग्रामीण सड़कों की नियमित मरम्मत, नवीनीकरण और देखरेख की जाएगी, जिनकी पांच साल की अनुरक्षण अवधि पूरी हो चुकी है या भविष्य में पूरी होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण सड़कों को समय से पहले खराब होने से बचाना, उनकी उपयोगिता बनाए रखना और सरकारी राशि का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की पहुंच जिला और क्षेत्रीय स्तर तक बढ़ाई जाएगी। इसके लिए बिहार सूचना प्रौद्योगिकी अवर सेवा नियमावली के तहत व्यवस्था विकसित की जाएगी।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रमंडल, जिला और प्रखंड स्तर पर तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के साथ सरकारी आईटी परियोजनाओं के क्रियान्वयन, निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत किया जाएगा। सरकार के अनुसार, इससे सरकारी सेवाओं के डिजिटल करने के कार्य को गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर तकनीकी समस्याओं का समाधान करना आसान होगा।