By नीरज कुमार दुबे | Nov 02, 2023
विपक्षी गठबंधन इंडिया ने एकता के दावे तो बड़े बड़े किये थे लेकिन हकीकत में यह गठबंधन बिखरा हुआ नजर आ रहा है। पटना, बैंगलुरु और मुंबई की बैठकों में विपक्षी नेताओं ने एक दूसरे का हाथ थाम कर एकता की कई कसमें खाईं थीं लेकिन जिस तरह एक दूसरे पर हमले किये जा रहे हैं वह दर्शा रहा है कि वह बैठकें मात्र टी, लंच और डिनर पार्टियां ही थीं। अभी कुछ दिन पहले दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच विवाद देखने को मिला उसके बाद बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच विवाद हुआ, फिर मध्य प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच तलवारें खिचीं और अब बिहार में जनता दल युनाइटेड और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग हो रही है।
नीतीश कुमार के इस बयान पर टिप्पणी करते हुए बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा, ‘‘वह भाकपा का सम्मेलन था। हमने उनका भाषण सुना। वह (नीतीश) लगातार ऐसा कहते हैं। नीतीश जी की उत्कंठा यह है कि जल्दी से जल्दी मोदी सरकार को हटाया जाए। लेकिन (उन्हें) समय से हटाया जाएगा, जब चुनाव होगा।'' उधर, नीतीश के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली में कांग्रेस प्रवक्ता नासिर हुसैन ने कहा कि लोकसभा चुनाव से छह महीने से पहले हो रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण हैं और कांग्रेस इनको गंभीरता से ले रही है।
विपक्षी गठबंधन की इस उठापटक पर प्रतिक्रया देते हुए भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि यह सब दर्शाता है कि इस गठबंधन के पास कोई विजन या मिशन नहीं है और सत्ता के लालच में ही यह लोग एक साथ आये थे लेकिन हितों का टकराव इन्हें आपस में ही लड़ा रहा है।