By प्रेस विज्ञप्ति | Oct 07, 2026
पटना। नेट मीटरिंग व्यवस्था में उपभोक्ता अपने घर पर लगे सोलर प्लांट से बिजली बनाता है। पहले इस बिजली का उपयोग उसके घर की जरूरत के लिए होता है। इसके बाद यदि कुछ बिजली बच जाती है, तो वह बिजली ग्रिड में चली जाती है। इस अतिरिक्त बिजली का समायोजन हर महीने के बिजली बिल में किया जाता है। यदि किसी महीने सोलर से बनी बिजली खपत से अधिक होती है, तो बची हुई बिजली का लाभ अगले महीने में ले जाया जाता है। इस तरह उपभोक्ता की अतिरिक्त बिजली अगले महीनों की खपत के साथ समायोजित होती रहती है। लेकिन वित्तीय वर्ष के अंत में जो अतिरिक्त बिजली बच जाती है, उसका क्रेडिट वर्तमान व्यवस्था में समाप्त हो जाता है।
इससे लोगों को अपने घरों पर रूफटॉप सोलर लगाने के लिए और प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, जिन उपभोक्ताओं ने पहले से सोलर प्लांट लगा रखा है, उन्हें भी अपनी अतिरिक्त बिजली के लिए उचित लाभ मिल सकेगा। इससे राज्य में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने और पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी। इसी तरह पीएम-कुसुम योजना के तहत किसान भी सोलर प्लांट लगाकर बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। इन सोलर प्लांटों से उत्पादित बिजली की खरीद ऊर्जा विभाग द्वारा की जा रही है। इससे किसानों को अपनी जमीन पर सोलर प्लांट लगाने और बिजली बेचकर आय प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। साथ ही, राज्य में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन भी बढ़ रहा है।
ऊर्जा विभाग द्वारा सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए उपभोक्ताओं, किसानों और सोलर प्लांट लगाने वाली कंपनियों को आवश्यक सहयोग देने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। सोलर प्लांट लगाने से लेकर बिजली को ग्रिड से जोड़ने तथा संबंधित प्रक्रियाओं में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। ऊर्जा विभाग का उद्देश्य है कि सोलर अपनाने वाले उपभोक्ताओं और किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिले तथा बिहार में सौर ऊर्जा का तेजी से विस्तार हो।