प्राकृतिक खेती से समृद्ध होगा Bihar, राष्ट्रीय बैठक में बोले कृषि मंत्री Vijay Kumar Sinha

By प्रेस विज्ञप्ति | Oct 17, 2026

कृषि मंत्री, बिहार सरकार, विजय कुमार सिन्हा ने कृषि भवन स्थित कार्यालय कक्ष से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘खेत बचाओ अभियान’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त किए।  माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के माननीय कृषि मंत्रीगण ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया।

इस अवसर पर श्री विजय कुमार सिन्हा ने माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ कृषि, मृदा स्वास्थ्य, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सामूहिक चिंतन एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने का एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि खेती केवल अन्न उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और जीवन का आधार है। खेत सुरक्षित रहेंगे, मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी और जल संसाधनों का संरक्षण होगा, तभी कृषि का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध बनेगा।

कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार किसानों को जागरूक करने तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री के मार्गदर्शन में राज्य में विगत 1 जून से 30 जून तक ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया गया। इस अभियान के अंतर्गत राज्यभर में 7,275 किसान चौपालों का आयोजन कर 6,19,436 किसानों को जागरूक किया गया। यह पहल किसानों तक वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की जानकारी पहुँचाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण रही है।

सिन्हा ने बताया कि आगामी 26 अक्टूबर से 30 नवंबर, 2026 तक प्रस्तावित ‘खेत बचाओ अभियान’ के संबंध में उन्होंने कहा कि बिहार में इस अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ संचालित किया जाएगा। इसके अंतर्गत किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जल संरक्षण तथा पोषक तत्वों के सतत प्रबंधन के प्रति जागरूक किया जाएगा। अभियान के माध्यम से किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय कर्मियों के बीच समन्वय को मजबूत करते हुए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया जाएगा।

कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञान केंद्रों और विभागीय कृषि प्रसार तंत्र के माध्यम से किसानों तक वैज्ञानिक एवं आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा उद्देश्य किसानों को जागरूक कर ऐसी कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जो उत्पादन के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता, जल संसाधनों और पर्यावरण के संरक्षण में भी सहायक हों।

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सिन्हा ने कहा कि कृषि को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, खेतों में नमी बनाए रखने, फसल विविधीकरण, फसल अवशेष प्रबंधन और दलहनी फसलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इन उपायों से मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने तथा कृषि उत्पादन की स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मिट्टी, संरक्षित जल और जागरूक किसान ही समृद्ध कृषि एवं आत्मनिर्भर बिहार की मजबूत नींव हैं। खेतों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है।

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