Bipin Chandra Pal Death Anniversary: बिपिन चंद्र पाल के उग्र और क्रांतिकारी तरीकों ने अंग्रेजों के छुड़ा दिए थे छक्के

By अनन्या मिश्रा | May 20, 2024

आज ही के दिन यानी की 20 मई को महान क्रांतिकारी बिपिन चंद्र पाल का निधन हो गया था। 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी के शुरूआत में देश की आजादी का आंदोलन अपना स्वरूप ले रहा था। 19वीं सदी के अंत तक आजादी की लड़ाई दो दलों गरम दल और नरम दल में बदल गई। हालांकि शुरूआत में नरम दल के नेता प्रभावी दिखाई दिए, लेकिन बाद में गरम दल के नेता अधिक चर्चा में रहे। वहीं गरम दल के नेता लाल बाल और पाल की तिकड़ी बहुत ज्यादा फेमस हुई। पंजाब के लाला लाजपत राय, महाराष्ट्र से बाल गंगाधर तिलक और बंगाल के बिपिन चंद्र पाल न सिर्फ अपने क्षेत्र बल्कि पूरे देश में फेमस हो गए थे। इस तिकड़ी में बिपिन चंद्र पाल को क्रांतिकारी विचारों के जनक के रूप में जाना जाने लगा। आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिसर्सरी के मौके पर बिपिन चंद्र पाल के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

तत्कालीन बंगाल के सिल्हेट जिले के पोइली गांव में 7 नवंबर 1858 को बिपिन चंद्र पाल का जन्म हुआ था। यह स्थान वर्तमान समय में बांग्लादेश में है। बिपिन के पिता का नाम रामचंद्र पाल था। वह जमींदार होने के साथ-साथ फारसी भाषा के विद्वान भी थे। वहीं बिपिन चंद्र पाल समाज सुधारक, वक्ता, शिक्षक, लेखक और पत्रकार के रूप में भी जाने जाते थे।

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क्रांतिकारी विचारों के जनक

बिपिन को भारत में क्रांतिकारी विचारों का जनक कहा जाता है। उनके विचारों में ओज और स्पष्टता बचपन से झलकती थी। वह अपनी बात को खुलकर सबके सामने रखते थे। वह सार्वजनिक जीवन में जितना स्पष्टवादी और क्रांतिकारी रहे। उतना ही अपने निजी जीवन में भी थे। पत्नी की मौत के बाद उन्होंने एक विधवा महिला से शादी की थी। जो तब के जमाने में काफी बड़ी बात हुआ करती थी।

विरोध के उग्र स्वरूप

कांग्रेस में जुड़ते ही बिपिन चंद्र पाल एक बड़े नेता के तौर पर जाने जाते थे। इसी दौरान उनकी दोस्ती लाला लाजपत राय और बाल गंगाधर तिलक से हो गई। इन तीनों ने मिलकर क्रांतिकारी परिवर्तन के विरोध के उग्र स्वरूप को अपनाया। जिसके कारण यह जल्द ही देश में 'लाल बाल पाल' के नाम से फेमस हो गए। स्वदेशी आंदोलन, बहिष्कार, पूर्ण स्वराज और राष्ट्रीय शिक्षा देश  के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख हिस्सा हुआ करता था।

देशभर में हुए लोकप्रिय

बता दें कि साल 1905 के बाद बंगाल विभाजन के विरोध में लाल पाल और बाल की तिकड़ी पूरे देश में फेमस हो गई। पाल बंगाल में तो पहले से ही लोकप्रिय थे। वहीं इस मौके पर अंग्रेजी सरकार के वे मुखर विरोधी हो गए। उनके उग्र और सुधारवादी तरीकों ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए और उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ जाकर लोगों को जागरुक करने का काम किया।

मृत्यु

बिपिन चंद्र पाल ने अपने आखिरी सालों में खुद को कांग्रेस से अलग कर लिया था। उन्होंने अपने लिए एकांत जीवन चुना था। बिपिन चंद्र पाल ने अपना पूरा जीवन सामाजिक और आर्थिक कुरीतियों को खत्म करने में लगा थी। पाल ने जातिवाद को खत्म कर विधवा पुनर्विवाह पर भी जोर दिया। वहीं 20 मई 1932 को इस महान क्रन्तिकारी ने सदा के लिए अपनी आंखें मूंद ली।

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