बिशन सिंह बेदी अपने बेबाक फैसलों के लिए फिर चर्चा में आए

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Dec 27, 2020

नयी दिल्ली। कभी दुनियाभर के बल्लेबाजों को अपनी गेंदों पर नचाने वाले बिशन सिंह बेदी का अपने बेबाक फैसलों और टिप्पणियों के कारण भले ही विवादों से पाला पड़ता रहा लेकिन उन्होंने मन की बात कहने में कभी कोताही नहीं बरती जिसके कारण अपने जमाने का यह दिग्गज स्पिनर फिर से चर्चा में है। मामला फिरोजशाह कोटला में दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के पूर्व अध्यक्ष अरुण जेटली की प्रतिमा लगाने का था जिसका बेदी ने विरोध किया और स्टेडियम के स्टैंड से अपना नाम हटाने के लिए एक पत्र वर्तमान अध्यक्ष रोहन जेटली को भेज दिया। बेदी के इस पत्र में सौम्यता भी थी और संयम भी लेकिन उसके अंदर उन्होंने बड़ी खूबसूरती से विस्फोटक भी भर रखा था जिसने भारतीय क्रिकेट के कर्ता-धर्ताओं को भी सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि जब लार्ड्स में डब्ल्यू जी ग्रेस, सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में सर डोनाल्ड ब्रैडमैन, बारबाडोस में सर गारफील्ड सोबर्स और मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में शेन वार्न की प्रतिमा हो सकती है तो फिर भारतीय स्टेडियमों में किसी राजनीतिज्ञ की क्यों? बेदी ने अपने करियर में एक गेंदबाज, एक कप्तान और यहां तक कि एक मैनेजर के रूप में भी ऐसा साहस दिखाया। अपनी गेंदों की फ्लाइट, लूप और स्पिन से उन्होंने बल्लेबाजों को चकमा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वह साझेदारियां तोड़ने में माहिर थे और इसलिए स्टेडियम पर आवाज उठती ‘सरदार को गेंद दो।’ यही सरदार जब कप्तान बना तो वह रणनीतिक बन गए, लेकिन विरोध का उनका तरीका हमेशा अनोखा रहा और वह इसलिए क्योंकि मैदान पर बेदी ने हमेशा भद्रजन की तरह भद्रजनों का खेल खेला। इसलिए वेस्टइंडीज के खिलाफ किंगस्टन में 1976 में बल्लेबाजों के शरीर को निशाना बनाकर की जा रही गेंदबाजी पर जब भारत के पांच बल्लेबाज चोटिल हो गए तो बेदी ने अपने निचले क्रम के बल्लेबाजों को बचाने के लिए पारी समाप्त घोषित कर दी। 

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