By Prabhasakshi News Desk | Aug 25, 2024
एक अक्टूबर को सिर्फ एक ही चरण में हरियाणा की सभी 90 विधानसभा सीटों के लिए होना है। जिसको लेकर, राज्य में दोबारा उभर रही कांग्रेस से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुकाबला करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। चुनाव में तीसरे खिलाड़ी के रूप में जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) अपनी स्थिति बरकरार रखने की कोशिश कर रही है। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) भी एक खिलाड़ी के रूप में उभरने के लिए प्रयासरत है। हालांकि, दोनों प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों के बीच तीखे धुव्रीकरण की संभावना दिख रही है। भारतीय जनता पार्टी को हरियाणा में दोहरी सत्ता-विरोधी लहर से निपटना होगा क्योंकि वह पिछले 10 साल से राज्य और केंद्र दोनों जगह सत्ता में है।
खट्टर ने ओबीसी के लिए क्रीमीलेयर की दर वार्षिक आय घटाकर छह लाख रुपये कर दी थी। जिसे दोबारा बाद में आठ लाख रुपये कर दिया गया है। हरियाणा सरकार की विभिन्न नौकरियों में अग्निवीरों के लिए 10 फीसदी आरक्षण और फसलों के लिए विस्तारित न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था का वादा किया गया है। हरियाणा में जाटों और गैर-जाटों के बीच बुनियादी सामाजिक दरार ने पिछले दो विधानसभा चुनावों में भाजपा के पक्ष में काम किया। लेकिन भाजपा का बहु-जातीय गठबंधन 2019 के विधानसभा चुनाव तक कमजोर पड़ना शुरू हो गया था। बीते पांच सालों में किसान आंदोलन और अग्निपथ योजना ने इसे और कमजोर किया है।
इसके अलावा, पार्टी अपने खेमे के भीतर बहुत सारी प्रतिद्वंद्विताओं में फंसी हुई है। खुद विधानसभा में पार्टी के बहुमत पर सवालिया निशान लगा हुआ है। कांग्रेस इन सबको भुनाने और अपनी किस्मत पलटने की उम्मीद कर रही है। ऐसा लगता है कि कांग्रेस के चुनाव अभियान का नेतृत्व संभाल रहे पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने पार्टी को अपने पीछे एकजुट कर लिया है। उनका फोकस बेरोजगारी और कृषि क्षेत्र में संकट पर है। कांग्रेस को अब भी यह सुनिश्चित करना है कि उसके गुटीय नेता अंत तक एकजुट बने रहें। सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हालांकि पिछले 10 साल के न्यूनतम स्तर पर है, लेकिन यह अब भी पार्टी के मंसूबों में पलीता लगा सकता है। लोकप्रियता में गिरावट के बावजूद, भाजपा लोकसभा चुनाव में पूरी तरह उखड़ने से बचने में सफल रही। कांग्रेस और भाजपा में 10 लोकसभा सीटें बराबर-बराबर बंटीं, जबकि कांग्रेस ने राज्य भर में अपना मत प्रतिशत बढ़ाया। हरियाणा के नतीजे का असर कांग्रेस और भाजपा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पड़ेगा।