उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव एक बार फिर मोदी के नाम पर लड़ सकती है भाजपा

By अजय कुमार | Jan 19, 2021

उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधान सभा चुनाव होने हैं। बीजेपी सत्ता में रिटर्न होगी या फिर हमेशा की तरह यूपी के मतदाता इस बार भी ‘बदलाव’ की बयार बहाने की परम्परा को कायम रखेंगे ? अथवा 2017 की तरह मोदी का जादू फिर चलेगा। यह सवाल सबके जहन में कौंध रहा है। बस फर्क इतना है कि पिछली बार बीजेपी, मायावती-अखिलेश सरकार की खामियां गिना और वोटरों को सब्जबाग दिखाकर सत्ता में आई थी। वहीं अबकी से उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार को पांच साल का हिसाब-किताब देना होगा। ‘बीजेपी सरकार’ की बात इसलिए कही जा रही है क्योंकि 2017 का विधानसभा चुनाव बीजेपी बिना मुख्यमंत्री का चेहरा आगे किए मोदी के चेहरे पर लड़ी थी। योगी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला तो अप्रत्याशित रूप से चुनाव जीतने के बाद लिया गया था। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी की भले ही चौतरफा तारीफ हो रही हो, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि योगी अपने बल पर बीजेपी को 2022 का विधानसभा चुनाव जिता ले जाने में पूरी तरह से सक्षम हैं।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की बात की जाए तो वह इसी बात से संतुष्ट नजर आ रहे हैं कि उप-चुनावों में उनकी ही पार्टी भाजपा को चुनौती दे रही है। यानी सपा चुनाव जीत नहीं पाती है तो दूसरे नंबर पर तो रहती ही है। इसी को अखिलेश अपनी ताकत समझते हैं, जिस तरह से एक के बाद एक बसपा नेता हाथी से उतर कर साइकिल पर सवार हो रहे हैं उससे भी अखिलेश का हौसला बढ़ा हुआ है। सपा प्रमुख को सबसे अधिक मुस्लिम वोट बैंक पर भरोसा है, लेकिन जिस तरह से मात्र दलित वोट बैंक के सहारे बसपा सुप्रीमो मायावती सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने में नाकामयाब रहती हैं, उसी प्रकार से सपा सिर्फ मुसलमानों के सहारे अपनी चुनावी वैतरणी पार करने में नाकाम रहती है। बात वोट बैंक में सेंधमारी की कि जाए तो भीम सेना की नजर बसपा के दलित वोट बैंक में सेंधमारी की रहती है, वहीं ओवैसी, समाजवादी पार्टी के मुस्लिम वोट बैंक में हिस्सेदारी करने को आतुर हैं। कुछ सीटों पर जहां बसपा मुस्लिम प्रत्याशी उतारती है, वहां उसके (बसपा) भी पक्ष में मुसलमान लामबंद होने से गुरेज नहीं करते हैं।

हाँ, इस बार के विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी और ओवैसी के ताल ठोंकने से सियासत का रंग कुछ चटक जरूर हुआ है, लेकिन यह पार्टियां क्या गुल खिला पायेंगी, यह सब भविष्य के गर्भ में छिपा हुआ है। जहां तक ओवैसी की पार्टी की बात है तो उसके कूदने से समाजवादी पार्टी को ज्यादा नुकसान होता दिख रहा है। अपने पहले दौरे के दौरान ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलकर अपने इरादे भी स्पष्ट कर दिए हैं।

ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने वाराणसी पहुंचते ही मीडिया से बातचीत में तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश में जब अखिलेश यादव की सरकार की थी तो हमें 12 बार प्रदेश में आने से रोका गया था। अब मैं आ गया हूं। सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के साथ गठबंधन किया है, मैं दोस्ती निभाने आया हूं। ज्ञातव्य हो कि सुभासपा ने 2017 में भाजपा से यूपी विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन किया था। अजगरा विधानसभा क्षेत्र में संयुक्त रैली में गठबंधन की घोषणा के बाद विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल की कई सीटों पर बंटवारा हुआ था। मगर, वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद यह गठबंधन टूट गया। इसके बाद से ही सुभासपा नए साथियों के साथ अपनी सियासत को पूर्वांचल में मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। इसी क्रम में राजभर ने ओवैसी से सियासी दोस्ती की है।

इसे भी पढ़ें: अयोध्या में बन रहा भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर राष्ट्र मंदिर के रूप में भी जाना जायेगा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस भी एक ‘कोण’ बनना चाहती है। याद कीजिए जब 2019 के लोकसभा चुनाव के समय उत्तर प्रदेश कांग्रेस की जिम्मेदारी प्रियंका वाड्रा ने संभाली थी, तब राहुल गांधी ने मीडिया से कहा भी था कि हमारी नजर 2022 के विधानसभा चुनाव पर है। 2022 के विधानसभा चुनाव में अब साल भर से कुछ ही अधिक का समय बचा है, लेकिन पिछले डेढ़-दो वर्षों में कांग्रेस की दिशा-दशा में कोई खास बदलाव आया हो, ऐसा दिखाई नहीं देता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस मात्र रायबरेली संसदीय सीट जीत पाई थी, जहां से यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी स्वयं मैदान में थीं। राहुल तक अमेठी से चुनाव हार गए थे। इसके बाद तो राहुल गांधी ने यूपी की तरफ से मुंह ही फेर लिया। इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव के पश्चात हुए तमाम उप-चुनावों में भी कांग्रेस की ‘लुटिया’ बार-बार डूबती रही। अपवाद को छोड़कर प्रत्येक उप-चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी जमानत तक नहीं बचा पाए। अबकी बार भी कांग्रेस से कोई भी दल गठबंधन को तैयार नहीं है। 

बहरहाल, परिस्थितियां भाजपा के लिए जितनी भी अनुकूल क्यों न हों, लेकिन सियासी पिच पर कब कौन कैसा ‘बांउसर’ फेंक दे कोई नहीं जानता है। इसीलिए भाजपा आलाकमान यूपी पर पूरी तवज्जो दे रहा है। आलाकमान जानता है कि जब तक यूपी सुरक्षित है तभी तक दिल्ली का ‘ताज’ बचा रह सकता है। चुनाव चाहे 2014 के हों या फिर 2019 के लोकसभा चुनाव, दिल्ली में मोदी सरकार इसीलिए बन पाई क्योंकि यूपी में भाजपा का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा था और इसका सारा श्रेय मोदी को जाता है। संभवतः अबकी बार भी बीजेपी आलाकमान कोई नया प्रयोग करने की बजाए मोदी को ही आगे करके चुनाव लड़ेगा। योगी की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी, लेकिन कितनी यह भविष्य के गर्भ में छिपा है।

जिस तरह से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से साल भर पहले गुजरात कैडर के 1988 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस रहे अरविंद कुमार शर्मा को भाजपा में शामिल करके उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव के लिए मैदान में उतारा गया है, वह काफी कुछ कहता है। मूलतः मऊ के निवासी अरविंद कुमार शर्मा 20 साल तक नरेंद्र मोदी के साथ काम कर चुके हैं। अरविंद के बारे में चर्चा जोरों पर है कि उन्हें जल्द ही योगी कैबिनेट में महत्वपूर्ण स्थान दिया जा सकता है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि अरविंद मौजूदा डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा की जगह नये डिप्टी सीएम हो सकते हैं। दिनेश शर्मा के बारे में आलाकमान को अच्छी रिपोर्ट नहीं मिल रही है। दिनेश शर्मा की ईमानदारी पर तो किसी को संदेह नहीं है, लेकिन वह जनहित के काम नहीं कर पा रहे हैं। फिलहाल अरविंद मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं। वह इतना ही कह रहे हैं कि सीएम-पीएम और पार्टी जो भी दायित्व देंगे, उसे स्वीकार कर खरा उतरने का प्रयास करूंगा। अरविंद शर्मा की हैसियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सियासत में आए हुए अरविंद को 24 घंटे भी नहीं हुए थे, लेकिन पीएम मोदी के करीबी होने के नाते यूपी के भाजपाई उनसे मिलने और संपर्क तलाशने में जुट गए। पार्टी कार्यालय से लेकर कई चौराहों पर एके शर्मा के भाजपा में स्वागत के होर्डिंग्स टंग गए। उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित कई नेताओं ने भी ट्वीट कर पार्टी में स्वागत किया। इससे पहले गुजरात की मुख्यमंत्री रह चुकीं और मोदी की काफी करीबी नेता आनंदी बेन पटेल को यूपी का राज्यपाल बनाकर भेजा गया था। 

-अजय कुमार

प्रमुख खबरें

Hindustan Zinc में Stake Sale की तैयारी, ₹80,000 करोड़ का Disinvestment Target पूरा करेगी सरकार

Womens Asia Cup से पहले Pakistan को बड़ा झटका, Najiha Alvi चोटिल होकर बाहर, Sadaf Shamas की हुई एंट्री

England Cricket में बड़ा बवाल, Nightclub के बाहर हथकड़ी में दिखे Brydon Carse टेस्ट मैच से बाहर

हरियाणा में Godrej Group का मेगा प्लान, 20,000 करोड़ के Investment से खुलेंगे 40,000 Jobs के नए द्वार