By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 04, 2026
तिरुवनंतपुरम, चार अक्टूबर तिरुवनंतपुरम नगर निगम की पार्षद के रूप में पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आर श्रीलेखा की ओर से कथित तौर पर सौंपा गया त्यागपत्र सामने आने के एक दिन बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को ऐसे किसी भी घटनाक्रम से इनकार किया। तिरुवनंतपुरम के महापौर वीवी राजेश और भाजपा की तमिलनाडु इकाई के महासचिव एस सुरेश ने कहा कि श्रीलेखा अपने पद पर बनी रहेंगी। यह मामला तब सामने आया, जब श्रीलेखा की ओर से उनके वार्ड के निवासियों के व्हाट्सऐप समूह में कथित तौर पर भेजे गए संदेश में कहा गया कि उन्होंने महापौर को अपना इस्तीफा सौंप दिया है और पांच अक्टूबर को इसकी एक प्रति जिलाधिकारी को देंगी।
राजेश ने कहा, “आपको किसने बताया कि उन्होंने (श्रीलेखा) त्यागपत्र दे दिया है? वह अपने पद पर बनी रहेंगी और मैंने कल ही यह बात कह दी थी।” श्रीलेखा की ओर से व्हाट्सऐप समूह में कथित तौर पर भेजे गए संदेश के बारे में पूछे जाने पर महापौर ने सीधे जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा, “आप चाहते हैं कि शासन सुचारु रूप से चले।
जैसा कि सभी चाहते हैं तो शासन मजबूती से आगे बढ़ेगा।” राजेश ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम में किसी भी तरह के संकट से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पार्षद नियमित रूप से अपने-अपने वार्ड के लिए धनराशि मंजूर करने और कामकाज से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए पत्र देते रहते हैं। राजेश ने कहा, “वार्ड में कामकाज सुचारु रूप से चलाने के लिए मुझे ऐसा ही एक पत्र दिया गया था।
चूंकि, वह सत्ताधारी पार्टी की पार्षद हैं, इसलिए मुझे लगता है कि इसमें बताए गए कुछ मामलों में पार्टी के दखल की जरूरत है। कुछ काम महापौर को करने होंगे। हम इन मामलों पर वैसे ही कार्रवाई करेंगे, जैसे दूसरे पार्षदों से मिलने वाले पत्रों पर करते हैं।” उन्होंने कहा कि श्रीलेखा पार्षद पद पर बनी रहेंगी और अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगी।
दूसरी ओर, प्रदेश भाजपा महासचिव सुरेश ने रविवार दोपहर फेसबुक पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह श्रीलेखा से अस्पताल में मिलते नजर आ रहे हैं। उन्होंने लिखा कि श्रीलेखा बीमार हैं और वह सिर्फ जिम्मेदारियां निभाने की अपनी क्षमता को लेकर चिंतित हैं। सुरेश ने कहा कि श्रीलेखा पिछले कुछ दिनों से शारीरिक परेशानियों से जूझ रही हैं और वह उनसे मिलने अस्पताल गए थे।
उन्होंने कहा, “श्रीलेखा इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अपनी सेहत की वजह से क्या वह एक जन-प्रतिनिधि के तौर पर अपनी जिम्मेदारियां ठीक से निभा पाएंगी। उन्होंने यह बात सिर्फ अपने सबसे करीबी लोगों से जाहिर की थी। दुर्भाग्य से, यह मीडिया में चर्चा का विषय बन गया।” सुरेश ने कहा, “आर श्रीलेखा के इस्तीफा की खबर सही नहीं है।” उन्होंने मीडिया में आई उन खबरों को बेबुनियाद बताया, जिनमें कहा गया है कि श्रीलेखा किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो सकती हैं या वह भाजपा आलाकमान पर उन्हें कोई पद सौंपने के लिए दबाव बना रही हैं।
सुरेश ने कहा कि इस तरह की अटकलें लगाना ठीक नहीं है। उन्होंने इन खबरों को भी खारिज कर दिया कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर भाजपा का नियंत्रण खतरे में है। सुरेश ने कहा, “कुछ लोग ख्याली पुलाव पकाने लगे हैं कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा की सत्ता समाप्त हो जाएगी।
वे ऐसा करना जारी रख सकते हैं। तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा का शासन न केवल पांच साल तक, बल्कि उसके बाद भी बना रहेगा।” उन्होंने कहा कि केरलम की पहली महिला आईपीएस अधिकारी और डीजीपी श्रीलेखा ने पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता हमेशा बनाए रखी है। सुरेश ने श्रीलेखा को एक ऐसी महिला और मां बताया, जो पारंपरिक नेता नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीलेखा ने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी है और उनके पास कोई अवैध संपत्ति नहीं है। सुरेश ने उम्मीद जताई कि श्रीलेखा जल्द ही स्वस्थ हो जाएंगी और लोगों की सेवा करती रहेंगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश उपाध्यक्ष के सोमन, जिला अध्यक्ष करमना जयन और महापौर राजेश ने भी अस्पताल में श्रीलेखा से मुलाकात की।
इस बीच, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री वी शिवनकुट्टी ने श्रीलेखा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “श्रीलेखा जो कुछ भी कहती हैं, उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं, वह पद और सत्ता हासिल करने के लिए किसी भी तरह की धमकी का सहारा ले सकती हैं।
इसे भाजपा पर नया पद हासिल करने के लिए बनाए जा रहे दबाव के रूप में ही देखा जाना चाहिए।” यह पूछे जाने पर कि क्या श्रीलेखा कांग्रेस में जाने के लिए दबाव बना रही हैं, शिवनकुट्टी ने कहा कि कुछ नेता स्वाभाविक रूप से वहीं जाते हैं, जहां उन्हें अधिक लाभ मिलता है। उन्होंने कहा, “स्वाभाविक रूप से, कुछ लोग वहां जाते हैं, जहां उन्हें अधिक लाभ मिलता है। उन्हें जहां सबसे ज्यादा फायदा मिलता है, वे वहीं चले जाएंगे।” श्रीलेखा ने अब तक इस्तीफे के मुद्दे और विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
भाजपा पिछले साल पहली बार तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सत्ता में आई थी। 101 सदस्यीय नगर निकाय में उसे एक निर्दलीय पार्षद समेत 51 पार्षदों का समर्थन हासिल है। श्रीलेखा ने पिछले साल हुए स्थानीय निकाय चुनाव में शास्तमंगलम वार्ड से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी।
उनका भाजपा पार्षद के रूप में बने रहना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक निर्दलीय पार्षद के समर्थन के कारण तिरुवनंतपुरम नगर निगम में उसके पास मामूली बहुमत है। श्रीलेखा फिलहाल भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। उन्होंने अप्रैल में वट्टीयूरकावु विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन कांग्रेस नेता के मुरलीधरन से हार गई थीं।
केरलम के स्वास्थ्य एवं देवस्वओम मंत्री के मुरलीधरन ने श्रीलेखा की ओर से दिए गए इस्तीफे को रविवार को “नाटक” करार दिया। मुरलीधरन ने कहा कि वह इसे नाटक इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि नियमों के अनुसार इस्तीफा नगर निगम के सचिव को सौंपा जाना चाहिए था।