By संजय सक्सेना | Oct 22, 2024
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की नो विधान सभा सीटों पर चुनाव होना हैं इसमें से कुंदरकी विधान सभा सीट के लिये सपा और बीजेपी ने अभी तक अपने-अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा नहीं की है। सपा के लिये हमेशा से यह सीट फायदे का सौदा रही है। सपा मुस्लिम वोटों के सहारे यहां चुनाव आसानी से जीत जाती है,लेकिन इस बार बीजेपी मुस्लिम वोटरों में बिखराव के सहारे अपनी जीत सुनिश्चित करने में लगी है। सपा का गढ़ माने जाने वाली कुंदरकी विधानसभा सीट की राह 1993 के बाद से भाजपा के लिए हमेशा पथरीली रही है। सिर्फ 1993 में ही यहां कमल खिल सका है। 2012 से लगातार तीन चुनावों में साइकिल ही दौड़ती आ रही है। लंबे असरे बाद उपचुनाव लड़ रही बसपा ने रफतल्ला उर्फ नेता छिद्दा को प्रत्याशी घोषित किया है। बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारा है तो आजाद समाज पार्टी (आसपा) ने चांद बाबू को मैदान में उतारा है। कुंदरकी सीट पर सपा ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं यानी टिकट घोषित नहीं किए हैं. सपा से पूर्व विधायक हाजी रिजवान के चुनाव लड़ने की प्रबल उम्मीद है तो ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने यहां से मोहम्मद वारिस को उतारा है. इस तरह चार विपक्षी दलों से मुस्लिम कैंडिडेट मैदान में है, जिसके चलते मुकाबला मुस्लिम बनाम मुस्लिम कुंदरकी सीट का हो गया है। बीजेपी ने अभी टिकट घोषित नहीं किए हैं. सपा और भाजपा सभी गोटें बिछ जाने के बाद अपने प्रत्याशी के नाम की घोषणा करने का मूड बनाये हुए है। कुंदरकी में भाजपा डबल इंजन सरकार की ताकत लगाकर इतिहास पलटने की तैयारी में है, वह मुस्लिम मतों में सेंधमारी करने में भी जुटी है। जबकि सपा एमवाई (मुस्लिम यादव) समीकरण के सहारे फिर चुनावी वैतरणी पार करने की उम्मीद लगाए बैठी है।