BJP Leader Aparna Yadav ने आखिरकार तोड़ दी चुप्पी, पति Prateek Yadav ने किया था तलाक देने का ऐलान

By नीरज कुमार दुबे | Jan 22, 2026

सोशल मीडिया की एक पोस्ट ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। मामला उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष और भाजपा नेत्री अपर्णा यादव और उनके पति प्रतीक यादव के वैवाहिक संबंधों से जुड़ा है। प्रतीक यादव द्वारा इंस्टाग्राम पर तलाक की घोषणा और पत्नी पर लगाए गए तीखे आरोपों के बाद यह विवाद निजी दायरे से निकलकर सार्वजनिक बहस का विषय बन गया है।


हम आपको बता दें कि प्रतीक यादव ने सोशल मीडिया पर साझा की गई पोस्ट में अपर्णा यादव को स्वार्थी बताते हुए कहा कि उनके कारण पारिवारिक रिश्ते टूट गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अपर्णा सिर्फ प्रसिद्धि और प्रभाव चाहती हैं और उनकी मानसिक स्थिति की परवाह नहीं करतीं। पोस्ट में प्रयुक्त भाषा असाधारण रूप से आक्रामक थी, जिसने स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींचा। कुछ ही घंटों में यह पोस्ट वायरल हो गई और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

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इस बीच, अपर्णा यादव की ओर से शुरू में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। हालांकि बाद में उन्होंने पूरे विवाद पर खुलकर अपनी बात रखी। अपर्णा यादव ने साफ कहा कि उनके और उनके पति के बीच सब कुछ ठीक है और कुछ लोग जानबूझकर उनके निजी जीवन को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने इसे सुनियोजित प्रयास बताया जिसका उद्देश्य मानसिक दबाव बनाना और उन्हें सार्वजनिक जीवन से पीछे हटने के लिए मजबूर करना है।


अपर्णा यादव ने कहा कि कुछ लोग नहीं चाहते कि पारिवारिक रिश्ते मजबूत रहें। उन्होंने इशारों ही इशारों में कहा कि उनके लगातार सक्रिय रहने और अपने विचारों पर डटे रहने के कारण वे कुछ प्रभावशाली लोगों को असहज करती हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब आप दबाव में नहीं आते, तो बदनाम करने की कोशिश की जाती है। यह तरीका नया नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पूरे विवाद के पीछे जिन लोगों का हाथ है, उनकी पहचान हो चुकी है और सही समय आने पर सब कुछ सार्वजनिक किया जाएगा।


विवाद के बीच अपर्णा यादव के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी एक अहम बदलाव देखा गया। उनके सभी प्लेटफार्म पर कमेंट सेक्शन बंद कर दिए गए। माना जा रहा है कि यह फैसला सोशल मीडिया टीम ने तनावपूर्ण माहौल और अनियंत्रित प्रतिक्रियाओं से बचने के लिए लिया। वहीं प्रतीक यादव के अकाउंट को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी रही। पहले अपर्णा यादव के भाई ने प्रतीक का अकाउंट हैक होने की बात कही, लेकिन बाद में उसी अकाउंट से एक और पोस्ट आने के बाद यह दावा कमजोर पड़ गया।


इस पूरे घटनाक्रम ने इसलिए भी अधिक तूल पकड़ा क्योंकि अपर्णा यादव, समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू हैं और 2022 में उन्होंने समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था। वह यादव परिवार से भाजपा में जाने वाली अकेली सदस्य हैं। इससे पहले वह 2017 में लखनऊ कैंट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी हैं। वह राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं और अब तक उन्हें राज्य की महिलाओं से जुड़े विवादों को सुलझाते देखा गया था लेकिन अब उनका परिवार खुद विवाद में आ गया है।


देखा जाये तो अपर्णा यादव और प्रतीक यादव का विवाद हमारे समय की एक कड़वी सच्चाई को भी सामने लाता है। आज निजी रिश्ते भी सार्वजनिक मंचों पर फैसले सुनाने के लिए मजबूर हो गए हैं। सोशल मीडिया ने जहां अभिव्यक्ति की आजादी दी है, वहीं उसने संयम और गरिमा की सीमाएं भी धुंधली कर दी हैं। यह सवाल भी अनदेखा नहीं किया जा सकता कि क्या सार्वजनिक जीवन में सक्रिय महिलाओं को निजी स्तर पर अधिक कठोर परीक्षा से गुजरना पड़ता है? अपर्णा यादव के आरोप यदि सही हैं, तो यह एक खतरनाक प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है जहां असहमति को बदनामी के हथियार से दबाने की कोशिश होती है।


बहरहाल, समाज और राजनीति दोनों के लिए यह आत्ममंथन का समय है। रिश्तों की नाजुकता को पोस्ट और स्टोरी में तौलने की संस्कृति से बाहर निकलना होगा। निजी विवादों का समाधान संवाद से हो, न कि सार्वजनिक आरोपों से। यही लोकतांत्रिक और सभ्य समाज की पहचान है।

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