By अंकित सिंह | Jul 31, 2026
बिहार सरकार ने मंत्री दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद के लिए चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया था कि वे बिना विधानमंडल का सदस्य बने राज्य कैबिनेट में कैसे बने रह सकते हैं। खबरों के मुताबिक, इस व्यवस्था के तहत बीजेपी MLC देवेश कुमार ने विधान परिषद से इस्तीफ़ा दे दिया है। उम्मीद है कि इस खाली सीट से दीपक प्रकाश चुनाव लड़ सकेंगे और अपना मंत्री पद बनाए रख सकेंगे।
सुनवाई के दौरान, बेंच ने बिहार सरकार से सवाल किया कि कोई मंत्री किसी भी सदन के लिए चुने बिना संविधान में तय समय-सीमा से ज़्यादा समय तक पद पर कैसे बना रह सकता है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला संवैधानिक कानून से जुड़े एक अहम सवाल से जुड़ा है और राज्य सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया। मामले की अहमियत को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 4 अगस्त के लिए तय की है।
दीपक प्रकाश को विधान परिषद में भेजने का सरकार का फ़ैसला, कार्यवाही के दौरान उठी संवैधानिक चिंताओं को दूर करने और साथ ही राज्य कैबिनेट में उनकी मौजूदगी बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, दीपक प्रकाश को हाल ही में विधान परिषद की 10 सीटों के चुनाव में टिकट नहीं मिला था। ऐसे में संवैधानिक प्रावधानों के तहत उनका मंत्री पद खतरे में पड़ गया था। इस स्थिति से निपटने के लिए भाजपा ने अपने कोटे की एक सीट खाली करने का फैसला किया और देवेश कुमार ने इस्तीफा देकर रास्ता साफ कर दिया।
देवेश कुमार राज्यपाल द्वारा मनोनीत 12 विधान परिषद सदस्यों में शामिल थे और उनका कार्यकाल मार्च 2027 तक था। अब उनके इस्तीफे से खाली हुई सीट पर राज्यपाल कोटे से दीपक प्रकाश को मनोनीत किए जाने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो वे विधान परिषद के सदस्य बन जाएंगे और उनका मंत्री पद बरकरार रहेगा।
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