By अंकित सिंह | Sep 12, 2026
उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने वाले हैं। यह चुनाव सत्ताधारी भाजपा के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली में अपनी पकड़ मजबूत रखनी है तो यूपी में सरकार जरूरी है। हालांकि, हाल के दिनों में भाजपा को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है जिसमें जेन जी के अंदर बेचैनी और बेरोजगारी का खतरा तो है ही साथ ही साथ जातिगत मुद्दे जैसे मामलों ने भी भाजपा को परेशान कर रखा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में सत्ता को बरकरार रखना बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती है। फिलहाल पार्टी के भीतर कई तरह के मंथनों का दौर जारी है। दूसरी ओर योगी आदित्यनाथ 2027 के चुनाव में पार्टी की संभावनाओं को मजबूत करने के लिए विभिन्न जिलों का दौरा और वहां जनसंपर्क अभियानों को तेज कर चुके हैं।
यह बात भी सही है कि योगी आदित्यनाथ को लेकर भाजपा के भीतर भी एक समान राय तो नहीं है। हालांकि ऐसा पहले भी नहीं था। बावजूद इसके योगी आदित्यनाथ दो टर्म के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। तीसरी टर्म में पार्टी संभवत उन्हें के चेहरे पर चुनावी दांव लगा सकती है। इसका बड़ा कारण यह है कि योगी आदित्यनाथ जाति की राजनीति के बीच हिंदुत्व के बड़े चेहरा हैं। अगर विपक्ष जाति की राजनीति करेगा तो वहां बीजेपी योगी को हिंदुत्व के एक बड़े चेहरे के तौर पर पेश करेगी। इसके अलावा योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी खूबी कानून व्यवस्था है और इस कारण उनकी महिलाओं के बीच लोकप्रियता भी खूब है। पार्टी को लगता है कि भाजपा को लेकर सवर्णों के बीच जो नाराजगी है उसे योगी आदित्यनाथ ही काम कर सकते हैं। इसलिए भी पार्टी उनके चेहरे पर आगे बढ़ सकती हैं।
वर्तमान में देखें तो योगी आदित्यनाथ लगातार प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर रहे हैं। अलग-अलग परियोजनाओं का उद्घाटन करने के साथ ही वह विरोधियों पर भी निशाना साधने का मौका नहीं छोड़ रहे हैं। मई से लेकर अब तक अगर हम गौर करें तो उत्तर प्रदेश के 75 में से 44 से ज्यादा जिलों का दौरा योगी आदित्यनाथ ने कर लिया है। इन दौरों के दौरान उन्होंने 115 विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े परियोजनाओं का उद्घाटन या आधारशिला किया है। इन 115 सीटों में से 58 फ़ीसदी सीटे ऐसी हैं जहां लोकसभा चुनाव में विपक्षी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन आगे रहा था। यही कारण है कि भाजपा ने अभी से ही इन सीटों पर अपनी तैयारी शुरू कर दी है।
2024 लोकसभा चुनाव की बात करें तो इन 115 विधानसभा क्षेत्रों में सपा-कांग्रेस गठबंधन को 67 सीटों पर बढ़त मिली थी। इसमें 54 समाजवादी पार्टी के खाते में गया था जबकि 13 विधानसभा में कांग्रेस के पक्ष में रहा था। भाजपा 47 पर ही आगे रही जबकि उसकी सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकदल को एक सीट पर बढ़त थी। 2022 के समीकरण को देखें तो 115 में से भाजपा ने 71 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि तीन सीट पर अपना दल सोनेलाल और निषाद पार्टी ने दो सीट पर जीत हासिल की थी। समाजवादी पार्टी को सिर्फ 33 सीटें मिली थी जबकि उसके गठबंधन के उस समय सहयोगी रहे आरएलडी और सुभासपा को क्रमशः तीन और दो सीटें मिली थी। कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीतने में कामयाब रही थी।
इन 115 विधानसभा सीटों में 43 लोकसभा की सीटें आती हैं। 2024 में 21 पर समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की थी जबकि तीन सीटों पर कांग्रेस विजयी रही थी। भाजपा और उसके सहयोगी दलों के खाते में 19 सीटें आई थीं। कांग्रेस ने रायबरेली, सहारनपुर और बाराबंकी में जीत हासिल की थी। समाजवादी घाट के खाते में मैनपुरी, इटावा, आजमगढ़, फिरोजाबाद के अलावा रामपुर, गाज़ीपुर, फतेहपुर, अंबेडकर नगर, श्रावस्ती, कैराना और जालौन जैसी सीटे शामिल हैं। भाजपा ने जिन सीटों पर जीत हासिल की थी उनमें आगरा, गोरखपुर, अमरोहा, बुलंदशहर, गाजियाबाद, कुशीनगर, पीलीभीत, हाथरस, गौतम बुद्ध नगर, देवरिया, अलीगढ़, झांसी और महाराजगंज शामिल है। आरएलडी को बागपत और बिजनौर में जीत मिली थी।