Bengal में मतगणना से पहले बढ़ा सियासी तनाव, Mamata Banerjee के आरोपों पर BJP बोली- दीदी के चेहरे पर हार का डर साफ दिख रहा है

By नीरज कुमार दुबे | May 01, 2026

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले कोलकाता में सियासी माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच ईवीएम को लेकर आरोप प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। हम आपको बता दें कि गुरुवार रात मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अचानक सखावत मेमोरियल गर्ल्स हाई स्कूल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। यह वही स्थान है जहां भवानीपुर सीट की ईवीएम मशीनें रखी गई हैं। मुख्यमंत्री देर रात तक वहां मौजूद रहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कई स्थानों से ईवीएम में गड़बड़ी की जानकारी मिली है, जिसके बाद वह खुद स्थिति देखने पहुंचीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शुरुआत में केंद्रीय बलों ने उन्हें अंदर जाने से रोका, लेकिन निर्वाचन नियमों के अनुसार उम्मीदवार और चुनाव एजेंट को सील कक्ष तक जाने की अनुमति होती है। बाद में उन्होंने संबंधित अधिकारी से अनुमति लेकर अंदर प्रवेश किया। उनके इस कदम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।

वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के नेता शुभेन्दु अधिकारी ने मुख्यमंत्री के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि ईवीएम को लेकर संदेह जताना मुख्यमंत्री की पुरानी आदत है और यह उनकी संभावित हार के डर को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हर चुनाव से पहले ऐसे आरोप लगाना तृणमूल कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा बन चुका है।

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इस पूरे घटनाक्रम के बीच चुनाव आयोग और प्रशासन की ओर से भी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की गई। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कहा है कि मतगणना केंद्रों पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की कोई संभावना नहीं है और सभी स्ट्रॉन्ग रूम चौबीस घंटे सीसीटीवी निगरानी में हैं, जिसे बाहर से भी देखा जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिना ठोस प्रमाण के लगाए गए आरोप निराधार हैं। इसी बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने मतगणना में केंद्रीय कर्मियों की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह निर्वाचन आयोग का अधिकार क्षेत्र है और इसमें कोई अवैधता नहीं है।

हम आपको बता दें कि भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र, जहां मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता आमने सामने हैं, इस बार सबसे अधिक चर्चा में है। इसी क्षेत्र में गुरुवार को उस समय तनाव और बढ़ गया जब भाजपा कार्यकर्ताओं ने तृणमूल कांग्रेस के एक वाहन को रोक लिया। भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप था कि वाहन में संदिग्ध सामग्री ले जाई जा रही है और इसका उपयोग ईवीएम में छेड़छाड़ के लिए किया जा सकता है।

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कुछ कार्यकर्ताओं ने खुले तौर पर आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस नकली मशीनें लाकर उन्हें बदलने की कोशिश कर सकती है। इस दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।

वहीं मुख्यमंत्री ने इन आरोपों के बीच यह भी कहा कि उनकी पार्टी ईवीएम से छेड़छाड़ के लिए की जाने वाली हर तरह की कोशिश को विफल करेगी। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी पक्षपात का आरोप लगाया और कहा कि उनके दल के एजेंटों को गिरफ्तार किया गया है तथा कई जगह एकतरफा कार्रवाई हो रही है।

इसी विवाद के बीच राज्य की मंत्री शशि पांजा ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्ट्रांग रूम से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी किसी भी राजनीतिक दल को पहले से नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि एक कमरे को बिना किसी दल के प्रतिनिधि की मौजूदगी में खोला गया, जो नियमों के खिलाफ है। शशि पांजा ने दावा किया कि कैमरों में कुछ लोगों की गतिविधियां नजर आईं, जबकि वह कमरा पूरी तरह सील होना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि वहां गुलाबी लिफाफों में रखे डाक मतपत्र दिखाई दिए, जिससे संदेह और गहरा हो गया।

उधर, नेताजी इंडोर स्टेडियम के बाहर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जहां मतगणना से पहले ईवीएम और वीवीपैट मशीनें रखी गई हैं। देखा जाये तो इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को और अधिक गरमा दिया है। एक ओर जहां तृणमूल कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक नाटक बता रही है। चार मई को होने वाली मतगणना से पहले दोनों दलों के बीच अविश्वास का यह माहौल प्रशासन और चुनाव आयोग के लिए भी चुनौती बन गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मतगणना शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होती है या नहीं।

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