Kotia Dispute पर BJP का BJD पर पलटवार, तीन बार चुनाव कराने देने का लगाया आरोप

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 05, 2026

भुवनेश्वर, पांच नवंबर विवादित कोटिया क्षेत्र में आंध्र प्रदेश की ओर से ग्रामीण चुनावों की अधिसूचना जारी किये जाने को लेकर ओडिशा में राजनीतिक विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है और अब भाजपा ने मुख्य विपक्षी दल बीजद पर निशाना साधा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि बीजद ने पड़ोसी राज्य को वहां तीन बार चुनाव कराने की अनुमति देकर इस मुद्दे को उठाने का अपना ‘‘नैतिक अधिकार’’ खो दिया है। ओडिशा में कोरापुट जिले के कोटिया क्षेत्र के 30 से अधिक लोगों ने बृहस्पतिवार सुबह नौ बजे तक आंध्र प्रदेश के सारिकी गांव के एक मतदान केंद्र पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

इससे एक दिन पहले, ओडिशा पुलिस ने अंतरराज्यीय सीमा पर स्थित नेराडिवलसा गांव में आंध्र प्रदेश प्रशासन द्वारा बनाए गए एक मतदान केंद्र को सील कर दिया था। विपक्ष के नेता एवं बीजू जनता दल (बीजद) प्रमुख नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को दो पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ भाजपा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सहयोगी तेदेपा पर अपनी ‘‘निर्भरता’’ के कारण इस विवाद पर ‘‘चुप्पी’’ साधे हुए है। उन्होंने भाजपा के 2024 के चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादे के अनुसार ओडिशा की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग भी की है।

पलटवार करते हुए ओडिशा भाजपा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘प्रिय नवीन बाबू, आपने कोटिया में आंध्र प्रदेश को एक या दो बार नहीं, बल्कि तीन बार स्थानीय निकाय चुनाव कराने की अनुमति देकर ओडिशा की जनता को धोखा दिया।’’ इसमें कहा गया है, ‘‘आपने 2023 में उच्चतम न्यायालय में कोटिया के संबंध में कानूनी रूप से तर्कसंगत हलफनामा दाखिल करने में भी विफलता दिखाई, जिसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता था। अब न तो आपको और न ही आपकी पार्टी को कोटिया के मुद्दे पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार है।’’ पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि पटनायक ओडिशा के हितों की रक्षा करने में विफल रहे और अब ‘‘तीन दशक की विफलताओं को छिपाने तथा दोष भाजपा सरकार पर मढ़ने की कोशिश कर रहे हैं’’, जबकि भाजपा सरकार राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ओडिशा के उपमुख्यमंत्री के वी सिंह देव और पार्वती परिदा ने भी पटनायक पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने 24 वर्षों तक कोटिया के क्षेत्रीय विवाद पर चुप्पी साधे रखी और अब इस मुद्दे को उठा रहे हैं, जबकि मौजूदा सरकार ‘‘राज्य के दावों की सक्रिय रूप से पैरवी कर रही है।’’ सिंह देव ने कहा, ‘‘मैंने हमेशा माना है कि नेतृत्व का आकलन इस बात से नहीं होता कि संकट शुरू होने के बाद कोई कितने पत्र लिखता है, बल्कि इससे होता है कि चुनौती सामने आने पर वह कितना साहस दिखाता है।

करीब ढाई दशक तक नवीन पटनायक के पास कोटिया के मुद्दे पर ओडिशा का पक्ष मजबूती से रखने के हर अवसर थे।’’ उन्होंने कहा कि ओडिशा की सीमाएं ऐसी चीज नहीं हैं, जिन्हें समय-समय पर याद किया जाए, बल्कि उनकी रक्षा के लिए अटूट प्रतिबद्धता, निरंतर कार्रवाई और जरूरत के समय कदम उठाने का साहस जरूरी है। परिदा ने आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए पटनायक ने कोटिया में ओडिशा के क्षेत्रीय हितों की रक्षा के मामले में ‘‘चुप्पी साधे रखना’’ चुना। बीजद प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा के लिए ओडिशा से ज्यादा दिल्ली के राजनीतिक समीकरण मायने रखते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ओडिशा को बहाने या विश्वासघात नहीं, बल्कि जवाब चाहिए।’’ दशकों पुराने इस विवाद में ओडिशा और आंध्र प्रदेश, दोनों ही राज्यों का दावा है कि दो राज्यों की सीमा पर स्थित कोटिया ग्राम पंचायत के 28 में से 21 गांव उनके अधिकार क्षेत्र में आते हैं। यह मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है। ओडिशा की ओर से जनवरी 2022 में दायर एक मुकदमा भी अभी विचाराधीन है।

इन गांवों के लोगों को दोहरे मतदान का अधिकार प्राप्त है, जिसके तहत उन्हें दोनों राज्यों में मतदान करने का विशेष अधिकार है।

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