Prabhasakshi NewsRoom: महाराष्ट्र के बाद अब देश को परिवारवाद की राजनीति से मुक्त कराने के अभियान में जुटेगी भाजपा

By नीरज कुमार दुबे | Jul 01, 2022

महाराष्ट्र की सत्ता से परिवारवाद का खात्मा करते हुए भाजपा का जोर अब देश से भी परिवारवाद की राजनीति के खात्मे पर रहेगा। हैदराबाद में भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस संबंध में रणनीति बनाई जायेगी। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने अधिकतर संबोधनों में परिवारवाद की राजनीति को देश की असल समस्या करार देते हैं। माना जा रहा है कि भाजपा की नजर अब झारखंड में सरकार बनाने पर केंद्रित हो गयी है।

जहां तक महाराष्ट्र से उद्धव ठाकरे को सत्ता से बेदखल करने के बाद के परिदृश्य की बात है तो अब नये मुख्यमंत्री एवं शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे ने कहा है कि न केवल विधानसभा में उनके साथी विधायक, बल्कि पूरा राज्य इस बात से खुश है कि ‘‘बालासाहेब ठाकरे का शिवसैनिक मुख्यमंत्री बना है।’’ शिंदे ने उन पर विश्वास दिखाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित अन्य नेताओं का शुक्रिया भी अदा किया। मुंबई में शपथ लेने के बाद शिंदे आधी रात को ही गोवा लौट आए और वहां उनका इंतजार कर रहे अपने साथी विधायकों से मिले। वह केवल शपथ ग्रहण करने के लिए ही बृहस्पतिवार दोपहर को मुंबई गए थे। उन्होंने गोवा हवाई अड्डे पर पत्रकारों से कहा कि महाराष्ट्र उनके 50 विधायकों की वजह से ही यह दिन देख पाया है। शिंदे ने कहा, ‘‘मेरे साथी विधायक और पूरा महाराष्ट्र बेहद खुश है कि बाला साहेब ठाकरे का शिवसैनिक राज्य का मुख्यमंत्री बना है।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार वही काम करेगी, जिसकी महाराष्ट्र के लोग उनसे उम्मीद कर रहे हैं। शिंदे ने कहा कि उनकी सरकार समाज के हर तबके के साथ न्याय करने के लिए काम करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘हम बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को आगे बढ़ांएगे।’’

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मंत्रिमंडल विस्तार पर शिंदे का बयान

मंत्रिमंडल के विस्तार के सवाल पर उन्होंने कहा कि भविष्य की रणनीति पर उनके साथी विधायकों के साथ बैठक में फैसला किया जाएगा। इसके बाद उन्होंने गोवा के डोना पाउला रिज़ॉर्ट में पहुंचने पर पत्रकारों से कहा कि वह मोदी, शाह और भाजपा के नेता देवेंद्र फडणवीस का उन पर विश्वास दिखाने के लिए शुक्रिया अदा करते हैं। शिंदे ने कहा, ‘‘फडणवीस ने मुझे मुख्यमंत्री बनने का मौका देकर बड़ा दिल दिखाया है।’’ उन्होंने कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि उन सभी 50 विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में पर्याप्त विकास कार्य हो, जिन्होंने उनका समर्थन किया है। शिवसेना नेता ने यह भी कहा कि वह इन विधायकों के पिछले ढाई साल के काम से अच्छी तरह वाकिफ हैं। उन्होंने 175 विधायकों का समर्थन होने का दावा करते हुए कहा कि विधानसभा में शक्ति परीक्षण ‘‘मात्र औपचारिकता’’ है। यह पूछे जाने पर कि वह ठाकरे परिवार के आवास ‘मातोश्री’ कब जाएंगे, शिंदे ने जवाब दिया, ‘‘आपको इसके बारे में सही समय पर पता चल जाएगा।’’ उधर, गोवा पहुँचने पर शिंदे को राज्य के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बधाई दी। सावंत ने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि आपके सक्षम नेतृत्व में और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के समर्थन और मार्गदर्शन से, महाराष्ट्र सर्वांगीण विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा।

पवार भी चौंक गये

दूसरी ओर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने दावा किया है कि एकनाथ शिंदे की सरकार में उपमुख्यमंत्री का पद स्वीकार करते हुए भाजपा के नेता देवेंद्र फडणवीस खुश नहीं दिख रहे थे। पवार ने पुणे में संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुझे लगता है कि फडणवीस ने खुशी से नंबर दो का स्थान स्वीकार नहीं किया है। उनके चेहरे के भाव ने सब कुछ बयां कर दिया।’’ पवार ने कहा कि फडणवीस नागपुर से हैं और उन्होंने एक 'स्वयंसेवक' के रूप में काम किया है और वहां, जब कोई आदेश आता है, तो उसका पालन करना पड़ता है।’’ उन्होंने कहा कि फडणवीस ने इस 'संस्कार' के कारण एक कनिष्ठ पद स्वीकार किया होगा। उन्होंने यह भी कहा कि उद्धव ठाकरे सरकार के खिलाफ बगावत करने के बाद गुवाहाटी में डेरा डाले हुए एकनाथ शिंदे गुट को उम्मीद नहीं थी कि उनके नेता उपमुख्यमंत्री से ज्यादा कुछ बनेंगे।

महाराष्ट्र सरकार के बड़े निर्णय

इस बीच, खबर है कि महाराष्ट्र विधानमंडल का दो दिवसीय विशेष सत्र 3 और चार जुलाई को होगा। 3 जुलाई को स्पीकर का चुनाव और 4 जुलाई को नयी सरकार सदन में अपना बहुमत साबित करेगी। अधिकारियों ने कहा कि एकनाथ शिंदे के राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभालने के बाद कैबिनेट की पहली बैठक में यह निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि सत्र के पहले दिन विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होगा। शिंदे ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि विकास परियोजनाओं में तेजी लाने की जरूरत है। आधिकारिक बयान में शिंदे के हवाले से कहा गया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों और प्रशासन को एक-दूसरे के सहयोग से काम करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमें नागरिकों के विश्वास पर खरा उतरने की जरूरत है।’’ शिंदे ने यह भी कहा कि कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जैसे अनुभवी नेता होने से उनके प्रशासन को मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मेट्रो और समृद्धि एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं में तेजी लाई जानी चाहिए।’’ बयान में कहा गया है कि फडणवीस ने नौकरशाही से प्रशासनिक फैसलों में तेजी लाने को कहा। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने राज्य में चल रहे बुवाई कार्यों का भी जायजा लिया।

उद्धव ने दी बधाई

वहीं, शिवेसना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को शुभकामनाएं दीं हैं। ठाकरे ने मराठी में ट्वीट किया, ‘‘नव नियुक्त मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे जी और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी को शुभकामनाएं। मैं कामना करता हूं कि आप महाराष्ट्र के लिए अच्छा काम करेंगे।’’

‘जूनियर’ पद स्वीकार करने वाले चौथे पूर्व मुख्यमंत्री हैं फडणवीस

दूसरी ओर, देवेंद्र फडणवीस बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र के ऐसे चौथे नेता हो गए, जिन्होंने मुख्यमंत्री रहने के बाद किसी सरकार में ‘जूनियर’ (कनिष्ठ) पद स्वीकार किया है। फडणवीस ने दिन में यह चौंका देने वाला ऐलान किया कि शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे राज्य में उद्धव ठाकरे सरकार गिरने के बाद नये मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे और वह खुद (फडणवीस) मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं होंगे। हालांकि, बाद में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कहा कि फडणवीस इस सरकार का हिस्सा होंगे और फडणवीस ने उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।

उल्लेखनीय है कि फडणवीस 2014 से 2019 तक पूरे पांच साल के कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री रहे थे। वहीं, 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद, जब शिवसेना का भाजपा से गठजोड़ टूट गया, फडणवीस अजीत पवार के नेतृत्व वाले राकांपा विधायकों के एक समूह के समर्थन से फिर से मुख्यमंत्री बने लेकिन आवश्यक संख्या बल नहीं जुटा पाने के चलते तीन दिनों के अंदर ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ गया। एक पूर्व मुख्यमंत्री का किसी सरकार में कनिष्ठ पद स्वीकार करना शायद ही देखने को मिलता है। लेकिन महाराष्ट्र में पूर्व में ऐसी स्थिति देखने को मिली है। कांग्रेस नेता शंकरराव चव्हाण 1975 में मुख्यमंत्री बने थे और वसंतदादा पाटिल द्वारा उनकी जगह लेने से पहले वह दो साल पद पर रहे थे। 1978 में शरद पवार, पाटिल कैबिनेट के मंत्री, ने सरकार गिरा दी और मुख्यमंत्री बन गये। पवार नीत प्रगतिशील लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार में चव्हाण वित्त मंत्री बने। शिवाजीराव पाटिल नीलांगकर जून 1985 से मार्च 1986 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे थे। कई वर्षों बाद वह 2004 में सुशील कुमार शिंदे सरकार में राजस्व मंत्री रहे। नारायण राणे, शिवसेना में रहने के दौरान, 1999 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे और एक साल से भी कम समय तक पद पर रहे थे। बाद में, वह शिवसेना छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गये। वह विलासराव देशमुख सरकार में राजस्व मंत्री बने।

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