चीनी सामानों के बहिष्कार से क्या होगा ? जब धडल्ले से बिक रहे हैं स्मार्टफोन

By अनुराग गुप्ता | Jun 26, 2020

नयी दिल्ली। भारत-चीन के बीच जारी गतिरोध के बीच देशभर में चीनी सामानों के बहिष्कार को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि वह चीनी सामानों का इस्तेमाल न करें और न ही उसे खरीदने के लिए बढ़ावा दें। वहीं सरकार ने भी इस दिशा की तरफ सोचना शुरू कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र की मोदी सरकार ने चीनी कम्पनियों पर लगाम लगाने के लिए टैरिफ लगाने की तैयारी कर रही है। जिन कम्पनियों का सीधे तौर पर या फिर अप्रत्यक्ष तौर पर चीन की सरकार से लिंक होगा उन पर सरकार प्रतिबंध लगा सकती है। क्योंकि ऐसी कम्पनियां राष्ट्रीय सुरक्षा में बाधा हो सकती हैं।

इसी बीच चीनी कम्पनी वन प्लस ने 25 जून को अपने लेटेस्ट स्मार्टफोन वन प्लस 8 प्रो को सेल के लिए उतारा जो कुछ ही मिनटों में आउट-ऑफ स्टॉक हो गया। वन प्लस स्मार्टफोन की सेल एमेजॉन इंडिया और वन प्लस की ऑफिशियल वेबसाइट पर थी। वन प्लस-8 की शुरुआती कीमत 54,999 रुपए है। जो अलग-अलग वैरिएंट के हिसाब से अलग-अलग है। 

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कम्पनी ने वन प्लस 8 के अप्रैल में लॉन्च किया था मगर सेल के जरिए दो महीन उपलब्ध कराया जा रहा है। इस फोन की अगली सेल 29 जून को होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिन भी मोबाइल चंद मिनटों में आउट-ऑफ स्टॉक हो जाएगा। इतना ही नहीं कम्पनी ने फोन को डिस्काउंट कूपन के साथ सेल किया है और आगे भी डिस्काउंट जारी रह सकता है।

वन प्लस 8 में 6.55 इंच का Fluid AMOLED डिस्प्ले दिया गया है। फोन में पंच-होल स्क्रीन 3D कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास प्रोटेक्शन के साथ दिया गया है। यह स्मार्टफोन क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 865 SoC प्रोसेसर और X55 5G चिपसेट के साथ दिया गया है। फोन में 48 मेगापिक्सल प्राइमरी (OIS और EIS), 16 मेगापिक्सल अल्ट्रा-वाइड ऐंगल और एक मैक्रो सेंसर के साथ ट्रिपल रियर कैमरा सेट अप है। इतना ही नहीं 4300 एमएच की बैटरी है। 

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चीनी स्मार्टफोन्स की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी 

भारत में अगर हम चीनी स्मार्टफोन की हिस्सेदारी की बात करें तो यह लगातार बढ़ती ही जा रही है। साल 2018 में 80 फीसदी थी जो 2019 में बढ़कर 71 फीसदी हो गई। हालांकि 2020 में कोरोना महामारी की वजह से ज्यादातर बाजार बंद रहे लेकिन पहली तिमाही में स्मार्टफोन बाजाप में चीनी कम्पनियों का कब्जा बढ़कर 81 फीसदी हो गया है।

चीनी कम्पनियों की बढ़ती हिस्सेदारी के पीछे भारतीय स्मार्टफोन कम्पनियों का भी हाथ बताया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय कम्पनियों ने लोगों के बीच तक अपनी पहुंच सही ढंग से नहीं बनाई। जबकि चीनी कम्पनियां इंसान की नब्ज पहचानती हैं। उन्हें पता है कि कम कीमत में लोगों को सारी सुविधाएं चाहिए और क्वालिटी भी अच्छी हो। ऐसे में चीनी कम्पनियों ने लगातार इन तमाम पहलुओं पर काम किया। जबकि भारतीय कम्पनियां अभी भी खुद को बेहतर करने में लगी हुई हैं। 

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रेडमी नोट 9 प्रो 

यही हाल रेडमी का भी है। कम्पनी ने नोट 9 प्रो मैक्स स्मार्टफोन की सेल शुरू की है। 6.67 इंच डिस्प्ले के साथ फोन में कम्पनी ने ट्रिपल कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 5 का इस्तेमाल किया है। साथ ही साथ कम्पनी ने स्मार्टफोन में जान फूंकने के लिए 5020 एमएच की बैटरी दी है। जैसे ही कम्पनी ने इसे सेल के लिए उतारों उसके ठीक 5 मिनट के भीतर ही ये फोन आउट-ऑफ स्टॉक हो गया। एक तरफ देशभर में चीनी सामानों के बहिष्कार का मुद्दा गर्म है तो दूसरे तरफ चीनी स्मार्टफोन का बोलबाला है। महीनों लोग सिर्फ मोबाइल फोन की सेल का इंतेजार करते हैं और कम्पनी जितने फोन सेल के लिए उतारती है वह चंद मिनटों में ही समाप्त हो जाते हैं।

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